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बोधगया में जमीन विवाद पर बड़ा एक्शन! पुलिस के बीच हुई नापी, 12.5 डिसमिल जमीन का क्या है पूरा मामला?

BodhGaya: लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद को लेकर बोधगया अंचल प्रशासन ने शनिवार को विवादित भूमि की नापी कराई. सीओ के नेतृत्व में अमीन की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में जमीन की पैमाइश और सीमांकन किया. शिकायतकर्ता राजेश सिन्हा का दावा है कि करीब 12.5 डिसमिल जमीन उनके दादा की खतियानी जमीन है और दूसरे पक्ष पर कब्जे तथा राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया गया है. 
 
BIHAR GAYA

BodhGaya: गया जिले के बोधगया थाना क्षेत्र के मौजा-बारा में लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद को लेकर शनिवार को अंचल प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। सीओ के नेतृत्व में अंचल अमीन की टीम ने विवादित जमीन की नापी और पैमाइश कराई। नापी के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए महिला और पुरुष पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

मौके पर अंचल प्रशासन की टीम भी मौजूद रही। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब मापी प्रतिवेदन और राजस्व अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई की उम्मीद है।

12.5 डिसमिल जमीन को लेकर वर्षों से विवाद

मामला मगध विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के बारा सहदेव खाप गांव से जुड़ा है। गांव निवासी राजेश सिन्हा का दावा है कि विवादित जमीन उनके दादा के नाम दर्ज खतियानी जमीन है। उनके मुताबिक, जमीन खाता संख्या 98 और खेसरा संख्या 1471 में दर्ज थी और कुल रकबा करीब 70 डिसमिल था।

राजेश सिन्हा का कहना है कि उनके दादा ने पहले करीब 57.5 डिसमिल जमीन बेच दी थी, जिस पर उनका कोई दावा नहीं है। उनका विवाद केवल बची हुई करीब 12.5 डिसमिल जमीन को लेकर है।

जमीन पर कब्जे और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप

राजेश सिन्हा ने आरोप लगाया कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर दूसरे पक्ष के इंद्रदेव यादव और उनकी बेटी सोनी कुमारी ने प्रशासनिक सहयोग से जमीन पर कब्जा कर लिया। उनका दावा है कि इस संबंध में उनके पास दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जमीन के स्वामित्व और रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और राजस्व अभिलेखों के मिलान के बाद ही स्पष्ट होगी।

2016 में मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा था मामला

राजेश सिन्हा के अनुसार, जमीन विवाद का मामला वर्ष 2016 में बिहार मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंचा था। उनका दावा है कि आयोग के निदेशक स्तर से उन्हें जमीन का कब्जा दिलाने की कार्रवाई की गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह अभी तक अपनी जमीन से विस्थापित हैं।

उन्होंने बताया कि डीसीएलआर की ओर से जमीन के सीमांकन का आदेश दिया गया था। इसी आदेश के तहत अमीन की टीम ने विवादित जमीन की नापी और सीमांकन की कार्रवाई की।

विरोध के बीच पुलिस की मौजूदगी में हुई नापी

शिकायतकर्ता के मुताबिक, नापी के दौरान दूसरे पक्ष की ओर से विरोध भी किया गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने नापी की कार्रवाई पूरी कराई।

प्रशासन की ओर से तैयार किए जाने वाले मापी प्रतिवेदन में जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमांकन और उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड का विवरण सामने आएगा।

रिपोर्ट के आधार पर तय होगी आगे की कार्रवाई

अब प्रशासन की नापी रिपोर्ट और राजस्व अभिलेखों के मिलान पर सबकी नजर है। राजेश सिन्हा ने प्रशासन से कथित राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

उनका कहना है कि पूर्व में बेची गई जमीन पर उनका कोई दावा नहीं है और उनकी मांग केवल बची हुई खतियानी जमीन पर कब्जा दिलाने की है।

फिलहाल जमीन के स्वामित्व और कब्जे की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। मापी प्रतिवेदन, राजस्व अभिलेख और स्थल की वास्तविक स्थिति के मिलान के बाद सक्षम प्राधिकारी के आदेश से ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।