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बिहार चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक एक्शन, 7 डीएसपी का तबादला- सरकार ने कसी लगाम

 
बिहार चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक एक्शन, 7 डीएसपी का तबादला- सरकार ने कसी लगाम

Bihar News: बिहार में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही प्रशासनिक हलचल भी तेज हो गई है। गृह विभाग ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सात पुलिस उपाधीक्षकों (डीएसपी) का तबादला कर दिया। राज्यपाल के आदेश पर जारी अधिसूचना में यह सूची सार्वजनिक की गई है। माना जा रहा है कि यह फैसला चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने और सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लिया गया है।

तबादला सूची में शामिल अधिकारी

अधिसूचना के अनुसार जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उनमें कई अहम नाम शामिल हैं—
    •    फरहत आलम – डीएसपी (मुख्यालय), अररिया से बदलकर डीएसपी (यातायात), अररिया बनाए गए।
    •    श्रवण शिव रंजन – डीएसपी (यातायात), नवादा से स्थानांतरित होकर विशेष सुरक्षा दल, बिहार, पटना भेजे गए।
    •    आकाश किशोर पटेल – डीएसपी (अपराध अनुसंधान विभाग), पटना से स्थानांतरित होकर विशेष सुरक्षा दल, बिहार, पटना में तैनात।
    •    अनूप कुमार मंडल मयूरी – डीएसपी (एसएसबी/आंतरिक सुरक्षा एवं आतंकी निरोधक शाखा), पटना से स्थानांतरित होकर विशेष सुरक्षा दल, बिहार, पटना में भेजे गए।
    •    मनोज कुमार सिंह – डीएसपी (लोहियानगर), पटना से बदलकर अब डीएसपी (मुख्यालय), अररिया बने।
    •    दीपक कुमार – डीएसपी (यातायात), अररिया से स्थानांतरित होकर विशेष शाखा पुलिस-7, अररिया में भेजे गए।
    •    राजेश रंजन – डीएसपी (विशेष शाखा पुलिस-1), पटना से बदलकर डीएसपी (सचिवालय सुरक्षा), पटना नियुक्त।

चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा कदम

प्रशासनिक फेरबदल को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से सीधे तौर पर जोड़ा जा रहा है।
    •    चुनावी माहौल में पुलिस और प्रशासन की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है।
    •    सरकार चाहती है कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई न रहे।
    •    यही कारण है कि अनुभव और जिम्मेदारी के हिसाब से अधिकारियों की तैनाती बदली गई है।

सख़्ती और सुरक्षा पर फोकस

सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव न केवल पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए है, बल्कि चुनावी दौरान किसी भी अप्रिय घटना पर काबू पाने की रणनीति का हिस्सा भी है।
    •    अररिया, पटना और नवादा जैसे जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती से अपराध नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन पर जोर रहेगा।
    •    विशेष सुरक्षा दल और सचिवालय सुरक्षा में अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर वीआईपी सुरक्षा और चुनावी व्यवस्थाओं को मजबूत करने की कोशिश की गई है।