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बांकीपुर हार के बाद उठे बड़े सवाल: बिहार विधानसभा में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व सिमटा सिर्फ एक विधायक तक

 
बांकीपुर हार के बाद उठे बड़े सवाल: बिहार विधानसभा में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व सिमटा सिर्फ एक विधायक तक

Bihar news: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा की हार के बाद अब बिहार विधानसभा में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व घटकर केवल एक विधायक तक रह गया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की बदलती राजनीतिक और सामाजिक तस्वीर पर चर्चा तेज कर दी है।

वर्तमान में सिकटा विधानसभा सीट से जनता दल (यू) के विधायक समृद्ध वर्मा ही विधानसभा में कायस्थ समाज का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर से नीरज सिन्हा की हार के बाद यह संख्या और कम हो गई।

कभी राजनीति में था मजबूत प्रभाव

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आजादी के बाद बिहार की राजनीति में कायस्थ समाज की मजबूत भागीदारी रही है। संविधान सभा के अंतरिम अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा और देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसी समाज से आते थे। लंबे समय तक यह समुदाय राजनीति, प्रशासन, शिक्षा और न्यायपालिका में प्रभावशाली भूमिका निभाता रहा।

वर्ष 1952 में हुए बिहार विधानसभा के पहले चुनाव में 252 सीटों में से 21 विधायक कायस्थ समाज से चुने गए थे। इसके बाद यह संख्या लगातार घटती चली गई।

प्रतिनिधित्व में लगातार गिरावट

पिछले सात दशकों में विधानसभा में कायस्थ समाज के विधायकों की संख्या लगातार कम होती गई। 1952 में जहां 21 विधायक थे, वहीं समय के साथ यह आंकड़ा घटते-घटते 2025 में दो और अब 2026 के बांकीपुर उपचुनाव के बाद केवल एक विधायक तक पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री से लेकर विधानसभा अध्यक्ष तक रही भागीदारी

बिहार की राजनीति में कायस्थ समाज ने कई अहम पदों पर अपनी पहचान बनाई। के.बी. सहाय और महामाया प्रसाद सिन्हा जैसे नेता बिहार के मुख्यमंत्री बने। वहीं बिंदेश्वरी प्रसाद वर्मा विधानसभा अध्यक्ष और सर राजीव रंजन प्रसाद विधान परिषद के सभापति जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे।

कम आबादी, लेकिन बड़ा राजनीतिक प्रभाव

बिहार जातीय सर्वेक्षण 2023 के अनुसार, राज्य में कायस्थ समाज की आबादी लगभग 7.5 लाख (करीब 0.60 प्रतिशत) है। आबादी कम होने के बावजूद यह समुदाय लंबे समय तक प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा।

भाजपा के सामने नई चुनौती

वर्तमान समय में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पटना साहिब से सांसद रविशंकर प्रसाद कायस्थ समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। हालांकि बांकीपुर उपचुनाव में नीरज सिन्हा की हार के बाद विधानसभा में इस समाज की मौजूदगी और कमजोर हो गई है।

बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कायस्थ समाज के प्रतिनिधित्व में आई यह गिरावट बिहार की बदलती चुनावी राजनीति और सामाजिक समीकरणों की ओर इशारा करती है। जातीय आधार पर बदलते राजनीतिक गठबंधन और नए मतदान पैटर्न के बीच कभी प्रभावशाली रहा यह समुदाय अब विधानसभा में अपने सबसे कम प्रतिनिधित्व के दौर से गुजर रहा है।