जनकवि बाबा नागार्जुन की जयंती पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष ने किया नमन, साहित्यिक योगदान को किया याद
Bihar News: हिंदी और मैथिली साहित्य के प्रख्यात कवि, लेखक और समाज सुधारक बाबा नागार्जुन की जयंती के अवसर पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज के वंचित, गरीब, किसान और मजदूर वर्ग की पीड़ा को मुखर स्वर दिया।
बिहार विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बाबा नागार्जुन को साहित्य जगत में ‘जनकवि’ के रूप में विशेष पहचान मिली। उनका मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था और वे मैथिली भाषा में ‘यात्री’ नाम से रचनाएं लिखा करते थे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि बाबा नागार्जुन की रचनाओं में जनवादी विचारधारा की गहरी छाप दिखाई देती है। उन्होंने साहित्य के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया और कविता के साथ-साथ उपन्यास, लघुकथा, आत्मकथा तथा यात्रा-वृत्तांत जैसी विधाओं में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी।
उन्होंने कहा कि “बादल को घिरते देखा है”, “युगधारा”, “पत्रहीन नग्न गाछ” और “हजार-हजार बाँहों वाली” जैसी कृतियां आज भी साहित्य प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। मैथिली साहित्य में उनके योगदान को विशेष रूप से याद किया जाता है।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि साहित्य और समाज के प्रति बाबा नागार्जुन की प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। साहित्य के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन की रचनाएं सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदनाओं और जनसरोकारों को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती हैं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके समय में थीं।







