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कैंपस प्लेसमेंट में बिहार का बढ़ता दबदबा, इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों से 15,246 छात्रों का चयन

राज्य सरकार के स्तर पर तकनीकी शिक्षा को लेकर किए गए प्रयासों का असर अब साफ दिखने लगा है. विजय कुमार चौधरी पहले ही यह कह चुके हैं कि नए सरकारी इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों की स्थापना से छात्रों का दूसरे राज्यों में पलायन रुका है और स्थानीय स्तर पर अवसर बढ़े हैं.
 
BIHAR

Patna: बिहार के तकनीकी शिक्षा संस्थानों ने इस वर्ष कैंपस प्लेसमेंट के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. राज्य के इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों से कुल 15,246 छात्रों का कैंपस सिलेक्शन हुआ है. इस उपलब्धि ने न सिर्फ बिहार के तकनीकी संस्थानों की साख को मजबूत किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि राज्य अब तकनीकी शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

बिहार के इस कॉलेज के 52 छात्रों का एक साथ एक ही कंपनी में प्लेसमेंट, इतना  होगा पैकेज

आंकड़ों के मुताबिक, इंजीनियरिंग कॉलेजों से 4,745 जबकि पॉलिटेक्निक कॉलेजों से 10,501 छात्रों को विभिन्न कंपनियों में नौकरी के ऑफर मिले हैं. आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की कंपनियों ने कैंपस ड्राइव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. ''इस वर्ष बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों से 4745 छात्रों और पॉलिटेक्निक कॉलेजों से 10501 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ है. इस तरह कुल 15246 छात्रों को रोजगार मिला है. कैंपस प्लेसमेंट के लिए सिस्को, एचसीएल, विप्रो, एलएंडटी और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कंपनियां बिहार के तकनीकी संस्थानों में आती हैं.'' यह कहना है बिहार के तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह का.

'बिहार को लेकर जो पूर्वाग्रह था, वह अब बदल रहा' : लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार के हर इंजीनियरिंग कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया गया है, जिसके लिए शिक्षकों को आईआईटी में प्रशिक्षण दिया गया है. बिहार को लेकर जो पूर्वाग्रह पहले था, वह अब बदल रहा है. इनोवेशन के क्षेत्र में भी बिहार के इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं.

नाम मात्र फीस में क्वालिटी एजुकेशन : लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि आज प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई के लिए सालाना एडमिशन फीस मात्र 10 रुपये और हर महीने की एजुकेशन फीस 10 रुपये है. इसके अलावा पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और अन्य गतिविधियों के लिए सालाना 2500 रुपये तथा 500 रुपये इंश्योरेंस शुल्क लिया जाता है.

''जो छात्र हॉस्टल में रहते हैं, उन्हें सालाना 1200 से 1500 रुपये तक खर्च करना पड़ता है. वहीं पॉलिटेक्निक कॉलेजों में एडमिशन फीस केवल 5 रुपये और प्रतिमाह एजुकेशन फीस 5 रुपये है. देश में इतनी सस्ती तकनीकी शिक्षा कहीं और उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण अब तकनीकी शिक्षा के लिए पलायन में काफी कमी आई है.''लोकेश कुमार सिंह, सचिव, बिहार तकनीकी शिक्षा विभाग

इंजीनियरिंग कॉलेजों में 14553 सीटें : लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में कुल 14553 सीटें हैं, जिनमें 81 प्रतिशत सीटें भर जाती हैं. वहीं पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 17243 सीटें हैं, जिनमें 93 प्रतिशत सीटों पर नामांकन होता है. उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए काउंसलिंग में लगभग 2 लाख छात्र शामिल होते हैं, लेकिन कुछ सीटें इसलिए खाली रह जाती हैं क्योंकि कई छात्रों को मनचाहा ब्रांच नहीं मिल पाता. तीन राउंड की काउंसलिंग के बाद प्रवेश प्रक्रिया बंद कर दी जाती है.

''राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए बिहार का डोमिसाइल होना छात्रों के लिए जरूरी है. शैक्षणिक कार्य के लिए दूसरे प्रदेशों से शिक्षक का चयन होता है लेकिन यहां बिहार के बच्चों को ही पढ़ाया जाता है.''लोकेश कुमार सिंह, सचिव, बिहार तकनीकी शिक्षा विभाग

विजय चौधरी ने की सराहना : दरअसल, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने विज्ञान प्रविधि एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रभारी मंत्री के रूप में विभाग से संबंधित कार्यों को लेकर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि वर्ष 1978 में उद्योग विभाग से अलग होकर विज्ञान एवं प्रविधि विभाग का गठन किया गया था, जिसे वर्ष 2023 में विज्ञान प्रविधि एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के रूप में नामित किया गया. यह विभाग राज्य में गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रहा है.

विजय चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार

''आज जितने भी विभाग हैं, उनमें इस विभाग का सबसे अधिक महत्व है, क्योंकि जीवन के हर क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक का प्रभाव दिखाई देता है. विज्ञान और तकनीक के बिना आज की दिनचर्या की कल्पना करना भी मुश्किल है.''विजय चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार

विजय चौधरी ने कहा कि विभाग तो पहले से बना हुआ था, लेकिन इसकी मौलिक गतिविधियां नीतीश कुमार के कार्यकाल में ही तेजी से शुरू हुईं. पहले स्थिति यह थी कि हर ब्लॉक से 10 से 15 बच्चे तकनीकी शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाते थे, लेकिन आज हर जिले में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेज स्थापित हो चुके हैं. इसके कारण बड़ी संख्या में छात्र अब बिहार में ही गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.