बिहार में डीएम, एसपी और डीआइजी को अल्टीमेटम, सरकारी आवास खाली करने का फरमान
Newshaat Desk: बिहार में जल संसाधन विभाग के भवन में बड़े पदाधिकारी अनधिकृत रूप से आवास कर रहे हैं. इनमें डीआइजी, डीएम, एसपी एवं अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी हैं. अब उन्हें यह आवास एक माह में खाली करना होगा. इसके अलावा लंबित किराया भी संबंधित विभाग को देना होगा. इस संबंध में राज्य के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने राज्य के तीन विभागों के पदाधिकारियों को पत्र भेजकर इन आवासों को खाली कराने एवं लंबित किराया भी जमा करने को कहा है.
उक्त सरकारी आवास से संबंधित 15 जिलों के जिलाधिकारियों को भी आदेश का अनुपालन करते हुए संबंधित पदाधिकारियों के स्थायी आवास के लिए भूमि का चयन कर भवन निर्माण का प्रस्ताव संबंधित विभागों को भेजने को कहा है. जल संसाधन विभाग के ऐसे 17 निरीक्षण भवनों में पदाधिकारियों के आवास हैं. एक निरीक्षण भवन नेपाल के कब्जे में है.
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव, गृह सचिव और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव को जारी पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल संसाधन विभाग के निरीक्षण भवनों को आधुनिक गेस्ट हाउस में परिवर्तित करने का निर्देश समीक्षा बैठक में दिया था.
मुख्यमंत्री के निर्देश के आलोक में जल संसाधन विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण वाले जिन निरीक्षण भवनों का उक्त विभागों के पदाधिकारियों द्वारा अनधिकृत रूप से आवास के रूप में उपयोग किया जा रहा है, उसे खाली कराया जाना है. अनधिकृत रूप से उपयोग किए जाने वाले इन भवनों का किराया भी वसूल किए जाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं. राज्य कैबिनेट ने भी इन निरीक्षण भवनों को आधुनिक गेस्ट हाउस में रूपांतरित करने की स्वीकृति दे दी है.
इन्हें आधुनिक गेस्ट हाउस में रूपांतरित करने के लिए खाली कराया जाना आवश्यक है. वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए इन आवासों को एक माह में खाली कराएं. जिन पदाधिकारियों पर अनधिकृत रूप से आवासित होने की बात कही गई है, उनमें सारण और चंपारण रेंज के डीआइजी, सुपौल के जिलाधिकारी, जमुई और अररिया के एसपी शामिल हैं.
मुजफ्फरपुर के सरैया एसडीपीओ का आवास भी जल संसाधन विभाग के निरीक्षण भवन में है. इसका कुल रकबा 9.34 एकड़ है. कुछ परिसर का रकबा उपलब्ध नहीं है. सरैया एसडीपीओ अभिजित कौर के अनुसार, आवास जल संसाधन विभाग के भवन में ही है, लेकिन अभी कोई अल्टीमेटम प्राप्त नहीं हुआ है.
इन पदाधिकारियों का आवास अनधिकृत रूप से जल संसाधन विभाग के भवन पर है.
पदाधिकारी परिसर का क्षेत्रफल एकड़ में
1. पुलिस उप महानिरीक्षक, चंपारण प्रक्षेत्र 0.06
2. पुलिस उप महानिरीक्षक, सारण
3. डीआइजी, एसएसबी, पूर्णिया 0.86
4. जिलाधिकारी, सुपौल 0.93
5. पुलिस अधीक्षक, जमुई 0.24
6. पुलिस अधीक्षक, अररिया
7. एसडीओ तारापुर, मुंगेर 0.25
8. एसडीओ हथुआ, गोपालगंज
9. एसडीओ महाराजगंज, सिवान
10. एसडीओ महुआ, वैशाली 0.15
11. एसडीपीओ सरैया, मुजफ्फरपुर 0.69
12. एसडीपीओ मढौरा, सारण
13. एसडीपीओ, बक्सर 2.00
14. एसडीपीओ, अरवल 1.00
15. अंचल कार्यालय बिहारीगंज, मधेपुरा 0.06
16. बैजनाथपुर ओपी, सहरसा 2.48
17. पस्तपार ओपी, सहरसा 0.08
#नेपाल के कब्जे में भी जल संसाधन विभाग की जमीन
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने द्वारा जारी पत्र में पश्चिमी कोसी नहर प्रमंडल, कुनौली की 0.54 एकड़ जमीन और निरीक्षण भवन के नेपाल के कब्जे होने की बात कही गई है. यह निरीक्षण भवन राजविराज में है.
राज्य में जल संसाधन विभाग के निरीक्षण भवनों में रहने वाले पदाधिकारियों की सूची विकास आयुक्त ने डीएम को भेजी है. मुख्यमंत्री के निर्देश और राज्य कैबिनेट से स्वीकृति के बाद यहां बनाए जाएंगे आधुनिक गेस्ट हाउस. एक माह में जगह खाली करने व लंबित किराया जमा करने के तीन विभागों को दिए गए निर्देश. चंपारण और सारण प्रक्षेत्र के डीआइजी, सुपौल डीएम और अररिया एवं जमुई एसपी के आवास शामिल. गृह विभाग का सबसे अधिक जमीन पर कब्जा, कई एसडीओ और एसडीपीओ के भी हैं आवास.
दरअसल, बिहार सरकार ने हाल ही में जल संसाधन विभाग के 217 निरीक्षण भवनों (इंस्पेक्शन बंगलो) को पीपीपी (PPP) मॉडल पर आधुनिक गेस्ट हाउस और पर्यटन केंद्रों के रूप में बदलने की योजना बनाई है, ताकि आम लोग भी इनमें ठहर सकें. अब तक इन बंगलों में केवल मंत्री या बड़े अधिकारी ही रुकते थे, लेकिन अब आम लोग भी किराया देकर ठहर सकेंगे. इन स्थानों को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा.







