बिहार में लो वोल्टेज की समस्या होगी दूर, 12 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार
बिहार में रहने वाले बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। राज्य में जल्द ही लोगों को लो वोल्टेज यानी कम वोल्टेज की समस्या से निजात मिल सकती है। इसके लिए ऊर्जा विभाग ने बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। योजना के तहत राज्यभर में पुराने और जर्जर बिजली के तारों और पोल को बदला जाएगा। साथ ही, बिजली की खपत और लोड के हिसाब से ट्रांसफार्मरों की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। इस पूरी योजना पर करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
दरअसल, बिहार में पिछले एक दशक के दौरान बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में दोगुने से भी ज्यादा बढ़ोतरी हुई है। घरों में एसी, कूलर और दूसरे बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने से बिजली की खपत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पुराने तारों और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसका नतीजा है कि कई जगहों पर लो वोल्टेज, तार टूटकर गिरने और ट्रांसफार्मर जलने जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं।
इन समस्याओं को दूर करने के लिए ऊर्जा विभाग ने करीब 12 हजार करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। प्रस्ताव को जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। योजना को लागू करने के लिए विभाग बैंकों से कर्ज लेने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा के दौरान मिले निर्देश के बाद ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने अधिकारियों को इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा था।
ऊर्जा विशेषज्ञों का भी मानना है कि अब ग्रामीण इलाकों में भी बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। ऐसे में केवल पुराने तार बदलना ही नहीं, बल्कि उच्च क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगाने, पावर सब-स्टेशन और ग्रिड की संख्या बढ़ाने की भी जरूरत है।
अगर इस योजना को मंजूरी मिलती है और इसे समय पर जमीन पर उतारा जाता है, तो बिहार के करीब सवा दो करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति का लाभ मिल सकता है। इससे लो वोल्टेज की समस्या कम होने के साथ ही बिजली व्यवस्था को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने में मदद मिलेगी।







