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बिहार के 38 जिलों में वृद्धाश्रम निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, राज्य सरकार से मांगी अद्यतन रिपोर्ट

 
बिहार के सभी 38 जिलों में ओल्ड एज होम निर्माण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह व जस्टिस राजेश कुमार वर्मा ने मधुकर आनंद की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया । जनहित याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट के डॉ अश्विनी कुमार बनाम केंद्र सरकार के मामलें में  देश के सभी राज्यों को जिला स्तर पर ओल्ड एज होम बनाने और रख रखाव हेतु जो दिशा निर्देश जारी किया था, उसका अनुपालन राज्य सरकार करे। सुप्रीम कोर्ट के उक्त दिशा निर्देश में राज्य सरकार पर यह कानूनी जिम्मेदारी डाली गई है कि असहाय बुजुर्गों की चिकित्सा , रोजाना देख रेख  की सुविधा  ओल्ड एज होम में मिले। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि मुज़फ़्फ़रपुर शहर में अवस्थित ओल्ड एज होम के लोगों को पटना , गया , पश्चिम चंपारण में शिफ्ट किया जा रहा है। राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता एस डी संजय ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि मुजफ्फरपुर में समाज कल्याण विभाग नया वृद्धाश्रम भवन बना रही है ,जो राज्य की समाज कल्याण  सक्षम योजना के अंतर्गत नव निर्मित भवन में  वृद्धों  को स्थानांतरित कर उन्हें हर बुनियादी वो चिकित्सा सेवा  सुचारू रूप से देना सुनिश्चित किया है।इस सक्षम योजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिलाधिकारियों को ओल्ड एज होम बनाने का भी निर्देश समाज कल्याण विभाग की तरफ से दिया गया है। महाधिवक्ता के पक्ष को सुन खंडपीठ ने सभी राज्यों में ओल्ड एज होम निर्माण की अद्यतन जानकारी तलब किया । इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

Bihar News: बिहार के सभी 38 जिलों में ओल्ड एज होम (वृद्धाश्रम) के निर्माण और वहां बुजुर्गों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार से यह बताने को कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जिलास्तर पर वृद्धाश्रम की व्यवस्था को लेकर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

जनहित याचिका पर हुई सुनवाई

एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मधुकर आनंद की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के डॉ. अश्विनी कुमार बनाम केंद्र सरकार मामले में जारी दिशा-निर्देशों को बिहार में प्रभावी तरीके से लागू कराने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को जिला स्तर पर वृद्धाश्रम स्थापित करने और उनके उचित संचालन एवं रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इन वृद्धाश्रमों में बेसहारा और जरूरतमंद बुजुर्गों के लिए नियमित देखभाल के साथ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना भी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

मुजफ्फरपुर के वृद्धाश्रम का मामला भी उठा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से मुजफ्फरपुर स्थित वृद्धाश्रम का मुद्दा भी कोर्ट के सामने रखा गया। आरोप लगाया गया कि वहां रह रहे बुजुर्गों को पटना, गया और पश्चिम चंपारण स्थित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है।

इस पर राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता एसडी संजय ने कोर्ट को सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

मुजफ्फरपुर में बन रहा नया वृद्धाश्रम भवन

महाधिवक्ता ने बताया कि समाज कल्याण विभाग की ओर से मुजफ्फरपुर में नया वृद्धाश्रम भवन तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ‘सक्षम’ योजना के तहत नवनिर्मित भवन में बुजुर्गों को स्थानांतरित करने की योजना है। यहां उनके लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं के साथ चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि सक्षम योजना के तहत समाज कल्याण विभाग ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों में ओल्ड एज होम के निर्माण को लेकर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बिहार के सभी जिलों में वृद्धाश्रम निर्माण और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की अद्यतन स्थिति रिपोर्ट तलब की है। कोर्ट अब यह देखेगा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में बुजुर्गों के लिए जिलास्तर पर किस तरह की व्यवस्था की गई है।

इस मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी।