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बिहार विधान परिषद चुनाव बना सियासी रण! NDA में ‘निशांत-दीपक’ की एंट्री तय?, दावेदारों में मची हलचल

 
बिहार विधान परिषद चुनाव बना सियासी रण! NDA में ‘निशांत-दीपक’ की एंट्री तय?, दावेदारों में मची हलचल
Bihar news: बिहार विधान परिषद की खाली हो रही 10 सीटों को लेकर राज्य की राजनीति पूरी तरह गर्मा गई है। सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक हर दल अपने राजनीतिक समीकरण साधने में जुट गया है। चुनाव आयोग की अधिसूचना जारी होने से पहले ही दावेदारों की दौड़ और अंदरखाने लॉबिंग तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार सत्तारूढ़ एनडीए इस बार बेहद रणनीतिक तरीके से उम्मीदवारों के चयन की तैयारी कर रहा है। गठबंधन के भीतर संगठन, सरकार और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर नामों पर मंथन चल रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा दो नामों को लेकर हो रही है- निशांत कुमार और दीपक प्रकाश। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दोनों को एनडीए की ओर से विधान परिषद भेजा जा सकता है। हाल ही में जदयू से जुड़े निशांत कुमार को गठबंधन का बड़ा चेहरा माना जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय लोक मोर्चा से जुड़े दीपक प्रकाश का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है।

NDA में सीट बंटवारे पर मंथन

सूत्र बताते हैं कि सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा, जदयू और सहयोगी दलों के बीच कई दौर की चर्चा चल रही है। संभावना जताई जा रही है कि एक सीट चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) को भी मिल सकती है। हालांकि छोटे सहयोगी दलों के लिए सीमित अवसर रहने के संकेत हैं।

चुनाव नहीं, शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे 2026 की राजनीति का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है। एनडीए जहां नए चेहरों और सामाजिक संतुलन के जरिए संगठन को मजबूत करने की रणनीति बना रहा है, वहीं विपक्ष भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर चल रहा है।

विपक्ष भी एक्टिव मोड में

तेजश्वी यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल सामाजिक समीकरणों को साधते हुए उम्मीदवारों के चयन में जुटी है। वहीं कांग्रेस भी अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हो गई है।

राजनीतिक गलियारों में फिलहाल नामों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कई पुराने नेता टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं, जबकि नए चेहरे भी अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं। अब सबकी नजर अंतिम सूची पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति का नया समीकरण तय कर सकती है।