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वीर सावरकर की जयंती पर बिहार विधान परिषद् में पुस्तक का लोकार्पण, मुख्यमंत्री ने अपराधियों को दी कड़ी चेतावनी

 
वीर सावरकर की जयंती पर बिहार विधान परिषद् में पुस्तक का लोकार्पण, मुख्यमंत्री ने अपराधियों को दी कड़ी चेतावनी
Bihar news: बिहार विधान परिषद् के उपभवन सभागार में बुधवार को अमर स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की 143वीं जयंती के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने “वीर सावरकर की जीवनी” पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिहार विधान परिषद् के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह ने की। समारोह की शुरुआत वीर सावरकर के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में वीर सावरकर के संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को याद करते हुए कहा कि जिन्होंने देश की आजादी के लिए 26-27 वर्षों तक जेल में रहकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने कहा कि वीर सावरकर का जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके विचारों को समाज तक पहुंचाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपे हों, बिहार पुलिस 48 घंटे के भीतर कार्रवाई कर उन्हें कानून के दायरे में लाने का काम करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि शोध और अध्ययन के बाद वीर सावरकर की जीवनी को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधान परिषद् के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि वीर सावरकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में इस तरह का यह पहला आयोजन है, जहां वीर सावरकर की जीवनी पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण किया गया है। उन्होंने पुस्तक के लेखकों अजय कुमार सिन्हा और संजय कुमार सिन्हा को इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए बधाई दी।

राज्यसभा सांसद श्री शिवेश कुमार ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और वीर सावरकर दोनों राष्ट्रहित और सामाजिक परिवर्तन के समर्थक थे। उन्होंने कहा कि इतिहास में कई बार जानबूझकर उनके विचारों को अलग-अलग रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की गई।

समारोह में विधान परिषद् और विधानसभा के कई सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी तथा समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण के विचारों को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।