Bihar news: नहीं रहे ‘अभियंता रत्न’ ई. सच्चिदानंद शर्मा, बिहार अभियंत्रण सेवा को लगा अपूरणीय झटका
ई० सच्चिदानंद शर्मा बिहार पथ निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता थे। वे न सिर्फ एक कर्मठ और ईमानदार अधिकारी के रूप में जाने जाते थे, बल्कि अभियंताओं की समस्याओं को मजबूती से उठाने वाले सशक्त नेता भी रहे। वे बिहार अभियंत्रण सेवा संघ के आजीवन सदस्य थे और लंबे समय तक संगठन को दिशा देने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।
गांव से विभाग के शीर्ष पद तक का सफर
ई० सच्चिदानंद शर्मा का जन्म 19 जनवरी 1944 को पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड अंतर्गत शिकारपुर गांव में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1965 में बीआईटी मेसरा से सिविल इंजीनियरिंग में बीएससी इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद दिसंबर 1965 में उन्होंने बिहार लोक निर्माण विभाग (PWD) में इंजीनियर असिस्टेंट के पद पर सेवा शुरू की।
अपने लंबे सेवाकाल में वे मार्च 1973 से जून 1987 तक सहायक अभियंता, जून 1987 से दिसंबर 1999 तक कार्यपालक अभियंता और दिसंबर 1999 से जनवरी 2002 तक अधीक्षण अभियंता के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने भवन निर्माण विभाग, पथ निर्माण विभाग और ग्राम्य अभियंत्रण संगठन में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
अभियंताओं की आवाज बने रहे
ई० शर्मा अभियंताओं के अधिकार और समस्याओं को लेकर हमेशा मुखर रहे। वे बिहार अभियंत्रण सेवा संघ के उपाध्यक्ष, यंग इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग सर्विस एसोसिएशन में जॉइंट सेक्रेटरी व जनरल सेक्रेटरी जैसे अहम पदों पर रहे। इसके अलावा वे 1974-75 में इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, बिहार ब्रांच की कार्यकारिणी समिति के सदस्य भी रहे।
उन्होंने 1977 में कोलकाता और 1989 में अहमदाबाद में आयोजित इंडियन रोड कांग्रेस के अधिवेशनों में बिहार पीडब्ल्यूडी का प्रतिनिधित्व किया। उनकी सेवाओं और योगदान को देखते हुए उन्हें गत वर्ष अभियंता दिवस के अवसर पर ‘अभियंता रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
शोक सभा में दी गई श्रद्धांजलि
ई० सच्चिदानंद शर्मा की आत्मा की शांति के लिए पटना के बोरिंग रोड स्थित अभियंता भवन में शोक सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उपस्थित अभियंताओं ने एक मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। शोक सभा में बिहार अभियंत्रण सेवा संघ के अध्यक्ष ई० सुनील कुमार, महासचिव ई० राकेश कुमार सहित कई वरिष्ठ और युवा अभियंता मौजूद रहे।
उनका जाना बिहार के अभियंत्रण जगत के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसे लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।







