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Bihar news: मजदूरी से मालिक तक: भागलपुर की रेखा दीदी ने 30 महिलाओं को बना दिया रोजगार देने वाली शक्ति

 
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Bihar news: नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में महिला सशक्तिकरण की कई मिसालें सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड की रेखा देवी की, जिन्हें आज लोग प्यार से ‘रोजगार देने वाली दीदी’ कहते हैं। कभी खुद संघर्ष में जीने वाली रेखा आज गांव की दर्जनों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी हैं।

मजदूरी से आत्मनिर्भरता तक का सफर

पीरपैंती प्रखंड की प्यालपुर पंचायत, गोकुल मथुरा गांव की रहने वाली रेखा देवी के पति कभी गुजरात में मजदूरी करते थे। घर की हालत बेहद खराब थी। पक्की छत नहीं थी और रोजी-रोटी के लिए जूझना पड़ता था। लेकिन रेखा ने हालात से हार नहीं मानी।

उन्होंने जीविका योजना से जुड़कर स्वयं सहायता समूह बनाया और खुद उसकी अगुवाई संभाली। धीरे-धीरे गांव की अन्य महिलाओं को भी साथ जोड़ती चली गईं।

30 महिलाओं को दिलाया रोजगार

आज रेखा देवी करीब 30 महिलाओं को आत्मनिर्भर बना चुकी हैं। उन्होंने महिलाओं को पीएमएफएमई योजना, कृषि विश्वविद्यालय सबौर से प्रशिक्षण और विभिन्न छोटे व्यवसायों से जोड़ा।

चाय स्टॉल, मशरूम उत्पादन, पकोड़े-सत्तू की दुकान, आटा चक्की और बकरी पालन जैसे काम शुरू कराए। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपये की मदद से कई महिलाओं को बकरी पालन के लिए आगे बढ़ाया गया।

मशरूम यूनिट बनी कमाई का जरिया

रेखा देवी आज अपने गांव में मशरूम उत्पादन यूनिट चला रही हैं, जहां 10 से 12 महिलाएं नियमित रूप से काम कर रही हैं। अगर मशरूम नहीं बिकता, तो उससे अचार बनाकर बाजार में बेचती हैं। खास बात यह है कि वे विधवा और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्राथमिकता देती हैं और उन्हें जीविका के जरिए लोन भी दिलवाती हैं।

बदली कई महिलाओं की तकदीर

पूजा, जो कभी उपेक्षा और तानों का शिकार थी, आज सिलाई मशीन और मशरूम यूनिट से अच्छी कमाई कर रही है।

वहीं शिल्पी दीदी, जिन्हें दो वक्त की रोटी भी मुश्किल थी, आज आटा चक्की और सत्तू उत्पादन से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

इन महिलाओं का कहना है कि जीविका और सरकार की योजनाओं ने उन्हें नया जीवन दिया है।

योजना की सफलता की मिसाल

जीविका के बीपीएम दीपक कुमार बताते हैं कि महिलाओं को समूहों में जोड़कर प्रशिक्षण और लोन दिया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि महिलाएं समय पर लोन लौटा रही हैं, जिससे योजना पूरी तरह सफल साबित हो रही है।

सम्मान के साथ आत्मनिर्भरता

रेखा दीदी की कहानी इस बात का सबूत है कि सही योजना और मजबूत इच्छाशक्ति से जिंदगी बदली जा सकती है। आज वे अपने उत्पाद दूसरे शहरों तक भेज रही हैं और गांव की कई महिलाएं सम्मान के साथ अपनी आजीविका चला रही हैं।

भागलपुर की रेखा देवी आज सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की पहचान बन चुकी हैं।