Bihar news: डिजिटल सर्वे से भिक्षावृत्ति पर निर्णायक प्रहार, पुनर्वास के साथ बदलेगी बिहार की तस्वीर
इस पहल का उद्देश्य भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों की पहचान, उनके सामाजिक-आर्थिक कारणों का आकलन और प्रभावी पुनर्वास सुनिश्चित करना है। खास बात यह है कि सर्वेक्षण का पूरा कार्य अब मोबाइल ऐप के माध्यम से किया जाएगा, जिससे डेटा संग्रहण और निगरानी अधिक पारदर्शी और तेज होगी।
संवेदनशीलता और गोपनीयता पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान सर्वेक्षकों को यह बताया गया कि सर्वे करते समय बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की पहचान अत्यंत संवेदनशील तरीके से की जाए।
मुख्य बिंदुओं में शामिल रहे—
• भिक्षावृत्ति में लिप्त व्यक्तियों की सही पहचान और वर्गीकरण
• गोपनीयता और नैतिक आचरण का पालन
• डिजिटल डेटा एंट्री, फोटोग्राफी और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया
• गरीबी, नशा, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक कारणों जैसे मूल कारणों का विश्लेषण
• पुनर्वास, कौशल विकास, आर्थिक सहायता और स्वरोजगार के विकल्पों की जानकारी
• कानूनी प्रावधान और तत्काल सहायता तंत्र
पुनर्वास पर फोकस
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अभियान का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को मुख्यधारा से जोड़ना है। योजनाओं के तहत कौशल प्रशिक्षण, आर्थिक सहयोग और पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों को सम्मानजनक जीवन मिल सके।
कार्यक्रम में वरीय प्रशासी पदाधिकारी पिंकी कुमारी, उप मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सुनील कुमार, अविनाश कुमार, सुशील कुमार श्रीवास्तव और शाहनवाज़ अहमद समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।
डिजिटल निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार का मानना है कि मोबाइल ऐप आधारित सर्वेक्षण से वास्तविक स्थिति का आकलन आसान होगा और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा।
राज्यव्यापी इस अभियान से उम्मीद है कि बिहार में भिक्षावृत्ति की समस्या पर ठोस और स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे।







