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Bihar Rapid Rail: पटना से मुजफ्फरपुर सिर्फ 1 घंटे में! NCRTC ने शुरू किया रैपिड रेल रूट का अध्ययन...

Bihar Rapid Rail:  बिहार में रीजनल रैपिड रेल सेवा की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. पटना से मुजफ्फरपुर के बीच प्रस्तावित रैपिड रेल परियोजना को लेकर NCRTC ने काम शुरू कर दिया है. फिलहाल संभावित रूट और कनेक्टिविटी का अध्ययन किया जा रहा है. परियोजना का लक्ष्य दोनों शहरों के बीच करीब 80 से 120 किलोमीटर की दूरी को लगभग एक घंटे में तय करने वाली तेज रेल सेवा विकसित करना है.
 
BIHAR

Patna:  बिहार में क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को नई रफ्तार देने की दिशा में कवायद तेज हो गई है। पटना से मुजफ्फरपुर के बीच प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर की शुरुआती तकनीकी तैयारी शुरू कर दी गई है। अगर यह परियोजना प्रस्तावित योजना के मुताबिक जमीन पर उतरती है, तो आने वाले वर्षों में पटना से मुजफ्फरपुर का सफर काफी कम समय में पूरा किया जा सकेगा।

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प्रस्तावित कॉरिडोर को हाजीपुर के रास्ते पटना और मुजफ्फरपुर से जोड़ने की योजना है। इसके लिए नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) को वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (AAR) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि NCRTC की टीम ने करीब एक सप्ताह पहले इस दिशा में तकनीकी अध्ययन शुरू किया है।

यात्री संख्या के आधार पर तय होगा रूट

परियोजना के शुरुआती चरण में NCRTC की टीम प्रस्तावित कॉरिडोर से जुड़े इलाकों का अध्ययन करेगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि किन क्षेत्रों से सबसे ज्यादा यात्री मिल सकते हैं और लोगों की यात्रा की जरूरत किस दिशा में अधिक है।

यात्रियों की संभावित संख्या और यात्रा पैटर्न के आधार पर रूट और स्टेशनों का निर्धारण किया जाएगा। कोशिश होगी कि कॉरिडोर ऐसे इलाकों से होकर गुजरे, जहां से बड़ी संख्या में लोग रोजाना पटना, हाजीपुर या मुजफ्फरपुर के बीच आवागमन करते हैं।

160 KM प्रति घंटे तक हो सकती है रफ्तार

प्रस्तावित RRTS सामान्य पैसेंजर ट्रेन या मेट्रो से अलग सेमी हाई स्पीड क्षेत्रीय रेल सेवा होगी। इसकी अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे तक और औसत परिचालन गति करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे रहने की क्षमता बताई जा रही है।

ऐसे में करीब 80 से 120 किलोमीटर की दूरी को लगभग एक घंटे में पूरा करने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सड़क या सामान्य रेल सेवा से पटना-मुजफ्फरपुर के बीच यात्रा में करीब डेढ़ से दो घंटे तक का समय लग सकता है।

नौकरीपेशा, छात्रों और कारोबारियों को होगा फायदा

अगर RRTS कॉरिडोर शुरू होता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को मिलने की उम्मीद है। पटना में काम करने वाले मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों के लोग कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

इसी तरह छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और अन्य दैनिक यात्रियों के लिए पटना-मुजफ्फरपुर के बीच आवागमन आसान हो सकता है। तेज क्षेत्रीय रेल सेवा से दोनों शहरों के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क भी मजबूत होने की उम्मीद है।

बस, रेलवे और मेट्रो से कनेक्टिविटी पर भी जोर

RRTS परियोजना का उद्देश्य केवल तेज रेल सेवा उपलब्ध कराना नहीं है। यात्रियों को बेहतर इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम देने की भी योजना है।

इसके तहत RRTS को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पटना मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से जोड़ने की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इससे यात्रियों को एक परिवहन माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुंचने में आसानी होगी।

जमीन, लागत और तकनीकी विकल्पों का होगा आकलन

AAR तैयार करते समय अलग-अलग संभावित रूट और विकल्पों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। इसमें जमीन की जरूरत, निर्माण तकनीक, संभावित लागत, यात्री संख्या और कनेक्टिविटी जैसे पहलुओं का आकलन किया जाएगा।

AAR के आधार पर सबसे व्यवहारिक विकल्प सामने आने के बाद DPR में परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत योजना तैयार की जाएगी।

चार RRTS कॉरिडोर को मंजूरी

बिहार कैबिनेट ने जुलाई में मुजफ्फरपुर-हाजीपुर-पटना समेत राज्य में प्रस्तावित चार RRTS कॉरिडोर के लिए AAR और DPR तैयार कराने को मंजूरी दी थी। इसके लिए 31.59 करोड़ रुपये के बजट को भी स्वीकृति दी गई है।

अब NCRTC को तकनीकी रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मिलने के बाद परियोजना की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

पटना-हाजीपुर-मुजफ्फरपुर को मिलेगी नई कनेक्टिविटी

प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर बिहार के तीन महत्वपूर्ण औद्योगिक और जनसांख्यिकीय केंद्रों - पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर - तेज क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क से जोड़ सकता है।

इसके अलावा प्रस्तावित सोनपुर एयरपोर्ट को भी भविष्य में इस कॉरिडोर से जोड़ने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। हालांकि अंतिम रूट और स्टेशन समेत परियोजना की विस्तृत तस्वीर AAR और DPR तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

अगर परियोजना आगे की मंजूरियों और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए जमीन पर उतरती है, तो आने वाले वर्षों में पटना से मुजफ्फरपुर का सफर तेज, सुविधाजनक और समय बचाने वाला हो सकता है।