Newshaat_Logo

भीषण गर्मी में ट्रेनिंग से भड़के बिहार के शिक्षक, बोले- “छुट्टियों में जबरन बुलाना अन्याय”

 
भीषण गर्मी में ट्रेनिंग से भड़के बिहार के शिक्षक, बोले- “छुट्टियों में जबरन बुलाना अन्याय”
Bihar news: बिहार में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और शिक्षा विभाग के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। भीषण गर्मी और ग्रीष्मावकाश के बीच शुरू किए गए सेवाकालीन प्रशिक्षण को लेकर शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। बड़ी संख्या में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम को तत्काल स्थगित करने की अपील की है।

शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग पहले ही 1 जून से 20 जून तक गर्मी की छुट्टियां घोषित कर चुका है। ऐसे में अवकाश के दौरान प्रशिक्षण आयोजित करना शिक्षकों के निजी और पारिवारिक जीवन में हस्तक्षेप जैसा है। उनका आरोप है कि अचानक जारी आदेश के कारण पहले से बनी पारिवारिक योजनाएं और जरूरी कार्यक्रम प्रभावित हो गए हैं।

कई शिक्षकों ने बताया कि उन्होंने छुट्टियों के दौरान इलाज, पारिवारिक समारोह और बच्चों के साथ समय बिताने की योजना पहले से तय कर रखी थी। कुछ शिक्षकों ने राज्य से बाहर जाने के लिए रेल टिकट तक बुक करा लिए थे। अब प्रशिक्षण अनिवार्य होने से उनकी पूरी योजना बिगड़ गई है।

दरअसल, यह मामला राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें पिछले सत्र में प्रशिक्षण से वंचित रह गए शिक्षकों के लिए विशेष बैच चलाने का फैसला लिया गया। विभाग का कहना है कि जो शिक्षक चुनाव ड्यूटी, जनगणना कार्य, स्वास्थ्य कारणों या अन्य अपरिहार्य परिस्थितियों की वजह से ट्रेनिंग नहीं ले पाए थे, उन्हें दोबारा मौका दिया जा रहा है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विधानसभा चुनाव और अन्य सरकारी कार्यों में लगे कई शिक्षक प्रशिक्षण सत्र में शामिल नहीं हो सके थे। ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर उन्हें 1 जून से शुरू हुए विशेष प्रशिक्षण सत्र में भाग लेने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि शिक्षक संगठनों का कहना है कि वे प्रशिक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भीषण गर्मी में जब स्कूल बंद हैं, तब शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए बुलाना व्यावहारिक नहीं है। संगठनों ने मांग की है कि प्रशिक्षण को फिलहाल टालकर जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई में स्कूल खुलने के बाद आयोजित किया जाए।

फिलहाल इस मुद्दे पर शिक्षकों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है और अब सबकी नजर सरकार के अगले फैसले पर टिकी हुई है।