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शिक्षा, त्याग और सेवा के संकल्प से बदलेगा बिहार: गार्गी पाठशाला के चतुर्थ वार्षिकोत्सव पर IPS विकास वैभव का प्रेरक संबोधन...

Patna: कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटना आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि भारतवर्ष में प्राचीन काल से ही आचार्यों को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त था. सम्राट भी उनके आगमन पर सिंहासन त्याग देते थे, जिसका प्रमुख कारण आचार्यों के भीतर निहित निःस्वार्थ भाव था. 
 
BIHAR PATNA

Patna: गार्गी पाठशाला के चतुर्थ वार्षिकोत्सव के अवसर पर Let’s Inspire Bihar अभियान के गार्गी अध्याय से जुड़ी सभी विदुषियों को बधाई दी गई. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पटना आईपीएस विकास वैभव ने कहा कि भारतवर्ष में प्राचीन काल से ही आचार्यों को सर्वोच्च सम्मान प्राप्त था. सम्राट भी उनके आगमन पर सिंहासन त्याग देते थे, जिसका प्रमुख कारण आचार्यों के भीतर निहित निःस्वार्थ भाव था. उस काल में शिक्षा पूरी तरह त्याग और सेवा पर आधारित थी, जहाँ अध्ययनरत विद्यार्थियों से किसी प्रकार की धनराशि की अपेक्षा नहीं की जाती थी और केवल स्वैच्छिक गुरुदक्षिणा का ही प्रावधान था.

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उन्होंने कहा कि यही निःस्वार्थ शिक्षादान की परंपरा आगे चलकर गुरुकुलों, शिक्षण संस्थानों और विश्वविख्यात विश्वविद्यालयों तक पहुँची. नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय जैसे शिक्षाकेंद्रों के संरक्षण का दायित्व आसपास के सैकड़ों गांवों ने सामूहिक रूप से निभाया, जिसके कारण भारत ज्ञान का वैश्विक केंद्र बना.

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गार्गी पाठशाला से जुड़ी विदुषियों के योगदान की सराहना करते हुए वक्ता ने कहा कि उनकी भूमिका भी प्राचीन आचार्यों के समकक्ष प्रतीत होती है. उनके प्रयासों से आज बिहार के 14 जिलों—पटना, बेगूसराय, रोहतास, खगड़िया, अररिया, दरभंगा, नवादा, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, बगहा (पश्चिमी चंपारण), नवगछिया (भागलपुर), गोपालगंज, सुपौल और मधेपुरा में गार्गी पाठशाला के 28 केंद्र संचालित हो रहे हैं. इन केंद्रों के माध्यम से 2500 से अधिक आर्थिक रूप से वंचित विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा दी जा रही है.

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बताया गया कि निःशुल्क शिक्षादान की अवधारणा अभियान की शुरुआत से ही मौजूद थी, लेकिन इसे धरातल पर उतारने का कार्य विदुषियों ने किया. वर्तमान में स्वैच्छिक अभियान के तहत बिहार के 18 जिलों में 33 निःशुल्क शिक्षा केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 28 केंद्र महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं. इसे बिहार के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक अत्यंत सकारात्मक संकेत बताया गया.

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि जिस भूमि पर गार्गी, मैत्रेयी जैसी विदुषियों की महान परंपरा रही हो, वहाँ का भविष्य निश्चित ही उज्ज्वल होना चाहिए. वक्ता ने कहा कि आवश्यकता केवल स्वत्व-बोध, समेकित प्रयास और सकारात्मक योगदान की है, क्योंकि महिलाओं की सामर्थ्य स्वतः सिद्ध है.

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उन्होंने यह भी बताया कि गार्गी अध्याय आज बिहार में संकल्पित और प्रबुद्ध महिलाओं का एक सशक्त वैचारिक एवं सामाजिक मंच बन चुका है. शिक्षा के साथ-साथ वंचित महिलाओं के स्वरोजगार के लिए गार्गी कला कौशल केंद्र, गार्गी गृहिणी और गार्गी कृत्या जैसे प्रयास किए जा रहे हैं. वहीं, गार्गी अन्नपूर्णा योजना के अंतर्गत समय-समय पर अन्नदान कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसे समाज के लिए अत्यंत सराहनीय पहल बताया गया.

कार्यक्रम के अंत में विकास वैभव कहा कि यह अवश्य सुखद है कि 3,60,000+ बिहारवासी आज व्हात्सएप समूहों के माध्यम से अभियान के साथ सीधे रुप से जुड़ चुके हैं जिनमें 30,000+ महिलाएं भी सम्मिलित हैं परंतु 2047 तक विकसित भारत में विकसित बिहार के निर्माण के निमित्त शिक्षा एवं उद्यमिता की वांछित क्रांति हेतु यह अत्यंत आवश्यक है कि 2028 तक बिहार के हर पंचायत तक अभियान के अध्यायों के साथ-साथ गार्गी अध्याय का भी विस्तार हो ताकि तीव्रता सहित प्रेरणा का प्रसार संभव हो सके. वार्षिकोत्सव से जुड़ी कुछ स्मृतियां भी साझा कीं और कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत सामाजिक यात्रा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान आगे भी निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और बिहार के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.