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बिहार के वार्ड सदस्यों को मिलेगा सालाना ₹2 लाख फंड! CM नीतीश का बड़ा फैसला, केंद्र को जाएगा प्रस्ताव

 
बिहार के वार्ड सदस्यों को मिलेगा सालाना ₹2 लाख फंड! CM नीतीश का बड़ा फैसला, केंद्र को जाएगा प्रस्ताव
Bihar news: बिहार की पंचायत राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को सशक्त बनाने की दिशा में अहम पहल की है। प्रस्ताव है कि प्रत्येक वार्ड सदस्य को विकास कार्यों के लिए सालाना 2 लाख रुपये का फंड दिया जाए। राज्य सरकार जल्द ही इस संबंध में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजेगी। स्वीकृति मिलते ही यह राशि सीधे वार्ड स्तर पर विकास योजनाओं में खर्च की जा सकेगी।

विधान परिषद में हुई घोषणा

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने सोमवार को विधान परिषद में यह जानकारी दी। वह एमएलसी सौरभ कुमार के प्रश्न का जवाब दे रहे थे। मंत्री ने बताया कि फिलहाल मनरेगा के तहत मुखिया को सालाना 10 लाख रुपये तक खर्च करने का अधिकार है, लेकिन वार्ड सदस्यों को समान रूप से अधिकार देने के मुद्दे पर केंद्र को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

अधिकारों की मांग पर गरमाई बहस

सदन में करीब आधे घंटे तक इस मुद्दे पर चर्चा हुई। सदस्य सच्चिदानंद राय ने आरोप लगाया कि कई बार मुखिया अपने समर्थक वार्डों में ज्यादा राशि खर्च करते हैं। पूर्व मंत्री संतोष सिंह ने मनरेगा, 15वें वित्त आयोग और छठे राज्य वित्त आयोग की राशि खर्च करने का अधिकार वार्ड सदस्यों को देने की मांग उठाई।

वहीं, पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि वार्ड सदस्यों को पंचायत बैठकों में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए, ताकि सभी वार्डों में संतुलित विकास सुनिश्चित हो सके।

शिलापट्ट पर नाम को लेकर भी उठा मुद्दा

विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि योजनाओं के शिलापट्ट पर संबंधित क्षेत्र के विधान पार्षद का नाम विधायक से पहले अंकित किया जाना चाहिए और कार्यक्रमों में उन्हें अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए।

ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि कई जिलों में निर्देश देकर शिलापट्ट में सुधार कराया गया है और जहां भी त्रुटि होगी, उसे दुरुस्त किया जाएगा।

पंचायत स्तर पर सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

अगर प्रस्ताव को केंद्र से मंजूरी मिलती है तो वार्ड सदस्यों को पहली बार स्वतंत्र रूप से विकास कार्यों के लिए फंड मिलेगा। इससे पंचायतों में पारदर्शिता और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आपको बता दें कि यह फैसला ग्रामीण शासन व्यवस्था में एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।