रायपुर में सधेगा बिहार का जल प्रबंधन! भूजल बचाने की नई तकनीक सीखेंगे अभियंता
यह प्रशिक्षण 27 अप्रैल से 1 मई तक राजीव गाँधी नेशनल ग्राउंड वाटर ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टिट्यूट में आयोजित किया जा रहा है। इसमें बिहार के विभिन्न जिलों- बक्सर, सुपौल, सारण, किशनगंज, नालंदा, समस्तीपुर, पटना, बेगूसराय, नवादा समेत कई जगहों के अभियंता शामिल हैं।
प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को हाइड्रोजियोलॉजी के मूल सिद्धांत, भूजल खोज की तकनीक, जलभृत (Aquifer) मानचित्रण, जियोफिजिकल सर्वे, वॉटर वेल डिजाइन और निर्माण जैसे अहम विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जा रही है। इसके साथ ही GIS तकनीक के इस्तेमाल, मॉनिटरिंग सिस्टम और डेटा कलेक्शन जैसे आधुनिक पहलुओं पर भी फोकस किया जा रहा है।
पहले दिन जहां थ्योरी और प्री-एसेसमेंट पर जोर दिया गया, वहीं आगे के सत्रों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के जरिए अभियंताओं को वास्तविक परिस्थितियों में भूजल प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के तरीके सिखाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से बिहार में गिरते भूजल स्तर, जल गुणवत्ता और संसाधन प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं के समाधान में काफी मदद मिलेगी। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भविष्य में जल संकट से निपटने की रणनीति भी मजबूत होगी।
सरकार को उम्मीद है कि प्रशिक्षण पूरा कर लौटने के बाद ये अभियंता राज्य में आधुनिक तकनीकों को लागू कर जल प्रबंधन प्रणाली को और प्रभावी बनाएंगे।







