“भैया, एम्बुलेंस जल्दी भेजिए…”: बिहार का ‘हनुमान’ स्टार्टअप बना जिंदगी की लाइफलाइन, 2 लाख से ज्यादा लोगों को दी नई सांस
कोविड महामारी के मुश्किल दौर में जब अस्पतालों और एम्बुलेंस की भारी किल्लत थी, उसी वक्त डॉक्टर नीरज झा और उनकी टीम ने एक ऐसी सेवा की शुरुआत की, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल दी। जुलाई 2020 में महज 2 लाख रुपये के छोटे निवेश से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों के टर्नओवर तक पहुंच चुका है।
संकट में बनी ‘संजीवनी’ सेवा
महामारी के दौरान जब लोग अपने घरों में ही जूझ रहे थे, तब ‘हनुमान एम्बुलेंस’ ने घर-घर तक मेडिकल सहायता पहुंचाकर उम्मीद की किरण जगाई। एक कॉल पर एम्बुलेंस, मेडिकल स्टाफ और जरूरी उपकरण मरीज के दरवाजे तक पहुंचने लगे, यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
2 लाख से ज्यादा जिंदगियां बचाईं
इस सेवा के जरिए अब तक 2 लाख से अधिक लोगों की जान बचाई जा चुकी है। खास बात यह है कि यह सुविधा सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी उतनी ही प्रभावी साबित हुई।
देशभर में फैला नेटवर्क
आज ‘हनुमान एम्बुलेंस’ का नेटवर्क देशभर में 3000 से ज्यादा स्थानों तक फैल चुका है, जबकि बिहार में ही 300 से अधिक एम्बुलेंस सक्रिय हैं। यह विस्तार इस बात का प्रमाण है कि एक छोटा सा विचार किस तरह बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।
सरकार से मिला सहयोग, मिली रफ्तार
स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में बिहार सरकार की योजनाओं का भी अहम योगदान रहा। ‘स्टार्टअप बिहार’ के तहत 25 लाख रुपये की सहायता और मैचिंग सपोर्ट लोन के रूप में 50 लाख रुपये की मदद मिलने से इस सेवा को नई उड़ान मिली।
नई सोच, नई पहचान
आज ‘हनुमान एम्बुलेंस’ सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि एक भरोसा बन चुका है-जहां हर कॉल के पीछे एक जिंदगी बचाने का जज्बा है। बिहार की यह पहल अब देशभर में हेल्थकेयर इनोवेशन की मिसाल बनती जा रही है।







