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बिजली दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर चैम्बर का विरोध, 2026-27 में राहत की मांग

 
बिजली दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर चैम्बर का विरोध, 2026-27 में राहत की मांग
Bihar news: बिहार विद्युत विनियामक आयोग द्वारा प्रस्तावित बिजली दर वृद्धि के खिलाफ बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने कड़ा ऐतराज जताया है। बुधवार को आयोग के कोर्टरूम में हुई जन-सुनवाई में चैम्बर ने भाग लेकर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरें न बढ़ाने की मांग रखी।

चैम्बर अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल ने बताया कि बिजली कंपनियों ने 35 पैसे प्रति यूनिट दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। इसी प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं और संगठनों की राय जानने के लिए आयोग ने अलग-अलग शहरों में जन-सुनवाई की। पटना में हुई सुनवाई में चैम्बर की ओर से ए.के.पी. सिन्हा ने लिखित और मौखिक दोनों तरह से आपत्ति दर्ज कराई।

चैम्बर ने दलील दी कि दो साल पहले डिमांड चार्ज और फिक्स्ड चार्ज बढ़ाए जा चुके हैं, साथ ही बिजली दरों में भी इजाफा हुआ था। इसके बावजूद कंपनियां मुनाफे में हैं और सरप्लस बना हुआ है। ऐसे में दर बढ़ाने के बजाय दरों में कमी की जानी चाहिए। साथ ही ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लॉस घटकर 11.46 प्रतिशत रह गया है, जो दर बढ़ाने के पक्ष में नहीं जाता।

उद्योगों के हित का मुद्दा उठाते हुए चैम्बर ने कहा कि बिहार में बिजली दरें पहले से ही ज्यादा हैं। अधिक बिजली खपत वाले उद्योग झारखंड में डीवीसी लाइन के कारण कम दर पर बिजली लेते हैं। बिहार में भी ऐसे उद्योगों के लिए समान टैरिफ तय किया जाना चाहिए, ताकि निवेश बढ़े और रोजगार सृजित हो।

चैम्बर ने यह भी मांग की कि अधिक ऊर्जा खपत करने वाले उद्योगों को लोड फैक्टर रिबेट जैसे प्रोत्साहन दिए जाएं। ऑनलाइन भुगतान पर पहले मिलने वाला 1 प्रतिशत फ्लैट रिबेट बिना किसी सीमा के बहाल किया जाए, क्योंकि मौजूदा कैप से बड़े उपभोक्ताओं को नुकसान हो रहा है।

इसके अलावा, एचटी उपभोक्ताओं के लिए लोड सीमा बढ़ाने, फिक्स्ड चार्ज को वास्तविक सप्लाई घंटों से जोड़ने और पटना जैसे शहरों में 24x7 बिजली आपूर्ति वाला विशेष जोन बनाने की मांग भी रखी गई। चैम्बर का कहना है कि इससे आधुनिक सेवाक्षेत्र की इकाइयां आएंगी और राज्य के विकास को गति मिलेगी।