गंडक की बाढ़ के बीच टूटा चंपारण तटबंध, बगहा पहुंचे पप्पू यादव; लापरवाही पर उठाए सवाल
Bihar Flood News: पश्चिम चंपारण में गंडक नदी की बाढ़ और चंपारण तटबंध टूटने के बाद अब राहत-बचाव के साथ सियासी हलचल भी तेज हो गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने सोमवार को बगहा और वाल्मीकिनगर के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
सांसद ने चखनी के खैरटवा में क्षतिग्रस्त चंपारण तटबंध का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बाढ़ से प्रभावित परिवारों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। दौरे के दौरान प्रभावित लोगों के बीच राहत सामग्री और नगद सहायता भी बांटी गई।
टूटे तटबंध का लिया जायजा
पप्पू यादव सड़क मार्ग से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे। उन्होंने तटबंध टूटने के बाद आसपास के इलाकों में पैदा हुई स्थिति को देखा और स्थानीय लोगों से बाढ़ की स्थिति के बारे में जानकारी ली।
लोगों ने सांसद को बाढ़, आवागमन, राहत सामग्री और बचाव अभियान से जुड़ी परेशानियों से अवगत कराया। इसके साथ ही फसल और संपत्ति को हुए नुकसान की जानकारी भी दी गई।
दो साल में दो बार तटबंध टूटने पर सवाल
निरीक्षण के दौरान पप्पू यादव ने तटबंध की स्थिति को लेकर जल संसाधन विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दो वर्षों के भीतर चंपारण तटबंध का दो बार टूटना गंभीर चिंता का विषय है।
सांसद ने कहा कि तटबंधों की निगरानी और समय पर मरम्मत को लेकर व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। उन्होंने तटबंध टूटने के मामले में जिम्मेदारी तय करने और यदि जांच में लापरवाही सामने आती है तो संबंधित संवेदक और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
बगहा-वाल्मीकिनगर को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करने की मांग
बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेने के बाद पप्पू यादव ने बगहा और वाल्मीकिनगर को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करने की मांग भी उठाई।
उन्होंने कहा कि फिलहाल सबसे जरूरी काम प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। भोजन, जरूरी सामान और अन्य सहायता जल्द से जल्द लोगों तक पहुंचाने के साथ राहत और बचाव अभियान को और तेज करने की जरूरत है।
फसल और संपत्ति के नुकसान का हो आकलन
सांसद ने बाढ़ से प्रभावित किसानों और परिवारों के नुकसान का उचित सर्वे कराने की मांग की। उनका कहना है कि जिन लोगों की फसल बर्बाद हुई है या जिनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है, उनके नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने पुनर्वास की व्यवस्था पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक केवल तत्काल राहत बांटने से समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए आगे की स्थायी व्यवस्था भी जरूरी है।
तटबंध टूटने के समय मौजूद व्यक्ति ने भी बताई आपबीती
उधर, तटबंध टूटने के समय मौके पर मौजूद संवेदक के एक सहयोगी ने घटना को लेकर अपनी आपबीती बताई है। उसके बयान के बाद तटबंध की निगरानी, मरम्मत और समय रहते बचाव के इंतजाम को लेकर सवाल और गहरे हुए हैं।
हालांकि, तटबंध टूटने में लापरवाही के आरोपों को लेकर संबंधित विभाग और अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष अभी सामने आना बाकी है। इसलिए इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अब जांच और राहत व्यवस्था पर नजर
चंपारण तटबंध टूटने की घटना के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर होने वाली जांच पर सबकी नजर है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि तटबंध की निगरानी और रखरखाव में कहीं चूक हुई थी या नहीं।
वहीं, बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने तत्काल राहत के साथ भविष्य के पुनर्वास की चुनौती भी है। ऐसे में सरकार की ओर से राहत, मुआवजा और तटबंधों की स्थायी सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण रहेगा।







