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पटना में एनकाउंटर के बाद बवाल, ASP समेत कई पुलिसकर्मी घायल; अस्पताल में पथराव और लाठीचार्ज

बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार की सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट से इलाका दहल उठा। मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर गंगा घाट के पास पुलिस और अपराधियों के बीच ऐसी मुठभेड़ हुई, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी
 
Patna

बिहार की राजधानी पटना में शुक्रवार की सुबह गोलियों की तड़तड़ाहट से इलाका दहल उठा। मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर गंगा घाट के पास पुलिस और अपराधियों के बीच ऐसी मुठभेड़ हुई, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। करीब 20 मिनट तक दोनों तरफ से गोलियां चलती रहीं। इस मुठभेड़ में पुलिस की गोली से तीन अपराधी घायल हो गए। अस्पताल ले जाने के दौरान तीनों की मौत हो गई। पुलिस इन्हें पेशेवर शूटर बता रही है, जबकि दूसरी तरफ मृतकों के परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुठभेड़ के बाद मामला सिर्फ तीन अपराधियों की मौत तक सीमित नहीं रहा। अस्पताल में परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते हंगामा, नारेबाजी, पथराव और सड़क जाम की स्थिति बन गई। हालात ऐसे बिगड़े कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चार थानों की पुलिस और 100 से अधिक जवानों को मोर्चा संभालना पड़ा।

पटना एसएसपी कार्तिकेय शर्मा के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब 4:30 बजे मनेर थाना क्षेत्र के शेरपुर गंगा घाट के पास पुलिस और अपराधियों का आमना-सामना हुआ। पुलिस का दावा है कि अपराधियों ने पुलिस टीम को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी मोर्चा संभाल लिया

एसएसपी के अनुसार, अपराधियों की तरफ से करीब 24 राउंड गोलियां चलाई गईं, जबकि पुलिस ने जवाबी कार्रवाई में 18 राउंड फायरिंग की। लगभग 20 मिनट तक चली इस मुठभेड़ में पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंजता रहा।पुलिस की जवाबी कार्रवाई में राजा शर्मा, बबलू कुमार और जेपी यादव घायल हो गए। तीनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

मुठभेड़ के बाद अस्पताल में उस समय तनाव बढ़ गया, जब मृतकों के परिजन और समर्थक वहां पहुंच गए। परिजन पुलिस की कार्रवाई को गलत बताते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर करार दे रहे थे। उनका कहना था कि जिन मामलों में पुलिस तीनों को आरोपी बता रही है, उनमें वे शामिल नहीं थे।

परिजन लगातार शव दिखाने की मांग कर रहे थे। उनका सवाल था कि आखिर पुलिस ने किस परिस्थिति में गोली चलाई और मुठभेड़ की पूरी सच्चाई क्या है? आक्रोशित लोग पुलिस-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग करने लगे। हंगामा बढ़ने के साथ ही अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई। भीड़ ने एंबुलेंस पर पत्थर फेंककर उसका शीशा तोड़ दिया। अस्पताल के पास खड़ी एक कार को भी निशाना बनाया गया और उसका शीशा क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने और भीड़ को हटाने की कोशिश की। लेकिन परिजन और समर्थक पीछे हटने को तैयार नहीं थे। कई बार पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कुछ लोगों के साथ हाथापाई की स्थिति भी बन गई। जब हालात लगातार बिगड़ने लगे तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए लाठियां चलाईं और भीड़ को खदेड़ने की कोशिश की। मौके पर चार थानों की पुलिस के साथ 100 से ज्यादा जवान तैनात किए गए। इसके बावजूद स्थिति को नियंत्रित करने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।