वजीरगंज की राजनीति में उभरता नया चेहरा- चिन्टू भैया बने युवाओं की आवाज़
Patna: बिहार की राजनीति में वजीरगंज विधानसभा सीट हमेशा से खास मानी जाती है। यह सीट गया लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और जातीय समीकरण यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2008 में अस्तित्व में आई इस सीट पर 2010 से अब तक बीजेपी ने मजबूत पकड़ बनाए रखी है। फिलहाल यहां से बीजेपी के विधायक वीरेंद्र सिंह प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
हालांकि, इसी वजीरगंज की राजनीति में एक नया नाम तेजी से उभर रहा है – चितरंजन कुमार उर्फ चिंटू भैया। मागधी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिंटू भैया ने बीते कुछ वर्षों में सामाजिक न्याय, युवाओं के अधिकार, किसानों और आम जनता की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाई है। यही वजह है कि गली-मुहल्लों से लेकर गांव-कस्बों तक आज लोग उन्हें एक संभावित विकल्प के तौर पर देखने लगे हैं।
राजनीति नहीं, जनसेवा का रास्ता
चिंटू भैया कहते हैं – “नेता बनने के लिए कुर्सी चाहिए, लेकिन जनसेवक बनने के लिए सिर्फ जनता का भरोसा चाहिए।” यही सोच उनके कामकाज में दिखती है। टूटी सड़क से लेकर गरीब किसानों के मुआवजे तक, बेटियों की सुरक्षा से लेकर युवाओं के लिए खेल मैदान की मांग तक – हर मुद्दे पर वे लगातार सक्रिय रहे हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भारतीय सबलोग पार्टी के टिकट पर वजीरगंज से चुनाव लड़ा और 11,162 वोट हासिल किए। भले ही वह जीत नहीं पाए, लेकिन करीब 6.35% वोट शेयर के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि वजीरगंज की राजनीति में एक नया विकल्प जन्म ले चुका है।
युवाओं के बीच बढ़ता असर
युवाओं के बीच चिंटू भैया की लोकप्रियता खास तौर पर बढ़ी है। उन्होंने रोजगार कैंप, कैरियर गाइडेंस सेमिनार और स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम आयोजित किए हैं। यही वजह है कि इलाके का युवा वर्ग उन्हें “यूथ आइकन” मानने लगा है।
जनता से सीधा जुड़ाव
चिंटू भैया का सफर सत्ता के गलियारों से नहीं बल्कि गांव की गलियों से शुरू हुआ। उन्होंने जनता की रोजमर्रा की तकलीफों को करीब से देखा और महसूस किया। यही वजह है कि लोग उन्हें अपना नेता नहीं बल्कि अपना बेटा मानते हैं।
बदलाव की नई सोच
वजीरगंज की राजनीति में अब जात-पात से आगे बढ़कर काम और कर्तव्य पर आधारित राजनीति की मांग उठ रही है। चिंटू भैया इसी सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे कहते हैं – “मैं राजनीति बदलने नहीं, राजनीति को साफ करने आया हूं।”







