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बिहार में निर्माण कार्यों की रफ्तार तेज: 600+ पंचायत सरकार भवन तैयार, 250 प्रखंड कार्यालय निर्माणाधीन

 
बिहार में निर्माण कार्यों की रफ्तार तेज: 600+ पंचायत सरकार भवन तैयार, 250 प्रखंड कार्यालय निर्माणाधीन
Bihar News: बिहार में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में तेज़ी साफ दिखने लगी है। भवन निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में सामने आया कि राज्यभर में 600 से अधिक पंचायत सरकार भवन तैयार हो चुके हैं, जबकि 250 से अधिक प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में 19 विभागों की विभिन्न परियोजनाओं की समीक्षा की गई। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जो योजनाएं तय समयसीमा से पीछे चल रही हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाए। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने की सख्त हिदायत दी गई।

राज्य में कुल 2615 पंचायत सरकार भवनों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें से 600 से अधिक भवन बनकर तैयार हो चुके हैं और 284 भवन संबंधित विभागों को सौंपे भी जा चुके हैं। सचिव ने निर्देश दिया कि शेष भवनों का निर्माण तेजी से पूरा कर हैंडओवर प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाए।

इसके अलावा 240 प्रखंडों में प्रखंड-सह-अंचल कार्यालय और 59 प्रखंडों में आवासीय परिसर के साथ भवन निर्माण कार्य चल रहा है। 250 से अधिक प्रखंड कार्यालयों का निर्माण जारी है, जबकि बाकी परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। टेंडर में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को तय समयसीमा में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में छपरा, दरभंगा, गया, कटिहार, खगड़िया, मधेपुरा समेत कई जिलों में बन रहे आवासीय भवनों, कोर्ट रूम, कारा भवनों और इंजीनियरिंग कॉलेजों के अतिरिक्त ढांचे की भी समीक्षा की गई। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए बन रहे आवासीय विद्यालय और छात्रावासों को प्राथमिकता से पूरा करने पर भी जोर दिया गया।

सचिव ने साफ कहा कि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग हो और गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पीएमआईएस पोर्टल पर सभी परियोजनाओं का डेटा अपडेट रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए।

स्पष्ट है कि बिहार सरकार अब विकास परियोजनाओं को सिर्फ कागज़ों से निकालकर जमीन पर तेजी से उतारने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।