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उपभोक्ता अब सिर्फ लाभार्थी नहीं, अधिकारों वाला नागरिक है: पटना में उपभोक्ता संरक्षण पर राष्ट्रीय मंथन

 
उपभोक्ता अब सिर्फ लाभार्थी नहीं, अधिकारों वाला नागरिक है: पटना में उपभोक्ता संरक्षण पर राष्ट्रीय मंथन

Bihar news: पूर्वी भारत में उपभोक्ता अधिकारों को और मजबूत बनाने की दिशा में मंगलवार को पटना में एक अहम पहल देखने को मिली। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अंतर्गत उपभोक्ता कार्य विभाग द्वारा “पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता संरक्षण” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला पटना स्थित होटल ताज सिटी सेंटर में संपन्न हुई, जहां केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने उपभोक्ता हितों से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया।

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कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में बिहार के मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत, भारत सरकार के उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव श्रीमती निधि खरे, अपर सचिव श्री अनुपम मिश्रा तथा बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के सचिव श्री अभय कुमार सिंह मौजूद रहे।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अपने संबोधन में कहा कि अब समय आ गया है जब सरकारी नीतियों में आम आदमी को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि उपभोक्ता के रूप में देखा जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज का नागरिक स्पष्ट जानकारी, निष्पक्ष व्यवहार, समयबद्ध समाधान और जवाबदेही का हकदार है। ये चारों स्तंभ उपभोक्ता संरक्षण की बुनियाद हैं।

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उन्होंने कहा कि पारंपरिक शासन मॉडल में योजनाएं बनती हैं, राशि जारी होती है और उद्घाटन कर दिया जाता है, लेकिन यह मॉडल अब अधूरा साबित हो रहा है। जब कोई व्यक्ति कोई सेवा या उत्पाद खरीदता है, तो उसकी अपेक्षाएं बहुत सरल होती हैं—सही गुणवत्ता, सुरक्षा, उचित कीमत और समस्या आने पर त्वरित समाधान। शासन व्यवस्था को इन्हीं अपेक्षाओं के अनुरूप ढलना होगा।

मुख्य सचिव ने ई-जागृति प्रणाली का उदाहरण देते हुए बताया कि इसके जरिए अब तक 45 करोड़ रुपये का रिफंड उपभोक्ताओं को दिलाया जा चुका है, जो परिणाम आधारित उपभोक्ता शासन का मजबूत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म या सरकारी ऐप का डिज़ाइन उपभोक्ता को केंद्र में रखकर किया जाना चाहिए।

वहीं, भारत सरकार की उपभोक्ता कार्य विभाग की सचिव निधि खरे ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक साझा दायित्व है। उन्होंने बताया कि ई-जागृति मॉडल के आधार पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। इसके साथ ही आईआईटी कानपुर के सहयोग से एनसीएच 2.0 के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स का उपयोग शुरू किया गया है।

श्रीमती खरे ने कहा कि मई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच केवल आठ महीनों में उपभोक्ताओं को 45 करोड़ रुपये का रिफंड दिलाया जाना इस बात का प्रमाण है कि यदि व्यवस्था सही दिशा में काम करे, तो उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

कार्यशाला के दौरान यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरा कि उपभोक्ता संरक्षण अब केवल शिकायत निवारण तक सीमित नहीं, बल्कि विश्वसनीय, जवाबदेह और परिणामोन्मुख शासन की पहचान बन चुका है। पटना में आयोजित यह मंथन पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता अधिकारों को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।