PMCH प्राचार्य को हटाने पर बढ़ा विवाद, बहाली और 100 करोड़ मुआवजे की उठी मांग
Bihar news: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) के प्रभारी प्राचार्य डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को पद से हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के औचक निरीक्षण के बाद हुई इस कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मामले में राज्य सरकार के शिकायत निवारण पोर्टल (RTMS) पर शिकायत दर्ज कराते हुए इस फैसले को अनुचित बताते हुए डॉ. सिंह की तत्काल बहाली और 100 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की गई है।

पटना के बुद्ध कॉलोनी निवासी सामाजिक और विधिक कार्यकर्ता प्रभाष चंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC), प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित कई संस्थाओं को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जनवरी 2026 में पीएमसीएच का प्रभार संभालने के बाद डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने अस्पताल की सुपर स्पेशियलिटी बिल्डिंग में रखे महंगे चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को उजागर किया था। शिकायत में दावा किया गया है कि इसी कारण उन्हें पद से हटाया गया।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य मंत्री का पीएमसीएच दौरा पूर्व नियोजित था और बिना कारण बताओ नोटिस या विभागीय जांच के महज 24 घंटे के भीतर डॉ. सिंह को पद से हटा दिया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि डॉ. सिंह अपनी कार्यशैली के कारण लंबे समय से विभागीय प्रताड़ना का सामना कर रहे हैं।
प्रभाष चंद्र शर्मा ने मांग की है कि डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह को सम्मानपूर्वक उनके पद पर बहाल किया जाए। साथ ही स्वास्थ्य मंत्री से सार्वजनिक माफी और कथित प्रतिष्ठा हानि के एवज में 100 करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
गौरतलब है कि 23 जून को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार पीएमसीएच में रेडियोलॉजी विभाग की नई सुविधाओं के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। मंत्री ने बताया था कि कई बार फोन करने के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो सका, जिसके बाद विभागीय कार्रवाई की गई।
उधर, पद से हटाए जाने के बाद डॉ. नरेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि बिना पर्याप्त अवसर दिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, जो उनके साथ अन्याय है।
हालांकि, शिकायत में लगाए गए भ्रष्टाचार, साजिश और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई से जुड़े सभी आरोप शिकायतकर्ता के दावे हैं। इन आरोपों पर अब तक स्वास्थ्य विभाग या संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।







