राजगीर मॉब लिंचिंग पर भड़का भाकपा-माले, हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच और दोषियों को फांसी की मांग
Bihar News: बिहार के नालंदा जिले के राजगीर में दो दलित युवकों की मॉब लिंचिंग और नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे ग्रामीणों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर भाकपा-माले ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद पार्टी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दोनों मामलों की न्यायिक जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए भाकपा-माले सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और राज्य में “एनकाउंटर राज” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजगीर में दो दलित युवकों की हत्या के बावजूद सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए, दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल चलाया जाए तथा पीड़ित परिवारों को 50 लाख रुपये मुआवजा और एक-एक सरकारी नौकरी दी जाए।
वहीं पालीगंज से भाकपा-माले विधायक संदीप सौरभ ने नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को “दमनात्मक” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने ग्रामीणों के घरों में घुसकर मारपीट की, सैकड़ों घरों के दरवाजे तोड़े और कई लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उन्होंने संबंधित थानाध्यक्ष को निलंबित करने, गिरफ्तार 39 लोगों को बिना शर्त रिहा करने और सभी मुकदमे वापस लेने की मांग की।
पूर्व विधायक गोपाल रविदास ने कहा कि राज्य में मॉब लिंचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और इसके लिए जिला प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने राजगीर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
वहीं पूर्व विधायक मनोज मंजिल ने आरोप लगाया कि बिहार में अपराध, दलित उत्पीड़न और महिला हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस न्याय दिलाने के बजाय कई मामलों को दबाने का काम कर रही है।
भाकपा-माले नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी।







