55 दिन बाद खत्म हुआ गतिरोध: बिहार में CO-RO की हड़ताल खत्म, राजस्व व्यवस्था फिर पटरी पर
आम जनता को मिलेगी बड़ी राहत
करीब 55 दिनों से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन), सीमांकन और अन्य जमीन से जुड़े कार्य ठप पड़े थे। हजारों आवेदन लंबित हो गए थे और लोग अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर थे। अब 4 मई से अधिकारियों के काम पर लौटने के साथ ही ये सेवाएं फिर शुरू होंगी, जिससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकार-प्रशासन टकराव के बाद निकला रास्ता
यह हड़ताल सरकार और अधिकारियों के बीच लंबे टकराव का परिणाम थी। हड़ताल के दौरान राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए कई अधिकारियों को निलंबित किया और वेतन रोकने की चेतावनी दी। हालांकि, स्थिति तब बदली जब प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल हुआ और तत्कालीन प्रधान सचिव सीके अनिल का तबादला कर दिया गया, जिसे सुलह की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
जनगणना पर भी मंडरा रहा था संकट
यह गतिरोध जनगणना 2027 के लिए भी चुनौती बन गया था। बिहार में जनगणना की जिम्मेदारी राजस्व विभाग पर ही है और 2 मई से घर-घर गणना का काम शुरू होना है। ऐसे में सीओ-आरओ की अनुपस्थिति से पूरा अभियान प्रभावित होने की आशंका थी।
सरकार के आश्वासन के बाद बनी सहमति
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने अधिकारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार और समाधान का भरोसा दिया, जिसके बाद हड़ताल समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है- हड़ताल के दौरान जमा हुए कामों का जल्द निपटारा और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करना।







