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अनंत सिंह पर JDU में मंथन, नीतीश के घर 3 घंटे चली बैठक; नीरज विवाद पर नेतृत्व ने नहीं खोले पत्ते

 
अनंत सिंह पर JDU में मंथन, नीतीश के घर 3 घंटे चली बैठक; नीरज विवाद पर नेतृत्व ने नहीं खोले पत्ते

Bihar News: बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट का चुनाव अब जेडीयू के लिए सिर्फ एक चुनावी मुकाबला नहीं रह गया है। पार्टी विधायक अनंत सिंह के अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर खड़े होने के बाद मामला अब जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है। गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री एवं जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के 7 सर्कुलर रोड स्थित आवास पर इस मुद्दे को लेकर करीब तीन घंटे तक अहम बैठक चली।

बैठक में जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव भी मौजूद रहे। बैठक समाप्त होने के बाद दोनों नेता बाहर निकले, लेकिन मीडिया के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अनंत सिंह के रुख को लेकर पार्टी नेतृत्व ने क्या तय किया है।

नीरज के खिलाफ अनंत, अनुज के साथ खुलकर मैदान में

पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू ने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर जन सुराज ने अनुज सिंह को मैदान में उतारा है।

अनंत सिंह ने जेडीयू के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय अनुज सिंह को समर्थन देने का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, अनुज के नामांकन के दौरान भी वह उनके साथ मौजूद रहे और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने की बात कह चुके हैं।

यानी एक तरफ जेडीयू अपने उम्मीदवार के लिए चुनावी अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ उसी पार्टी का विधायक प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय है। यही स्थिति अब पार्टी नेतृत्व के लिए भी अहम मुद्दा बन गई है।

पहले भी कराई गई थी सुलह की कोशिश

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद को खत्म कराने के लिए जेडीयू स्तर पर पहले भी दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाया गया था। सितंबर की शुरुआत में पार्टी कार्यालय में हुई बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने दोनों के बीच मतभेद दूर करने की कोशिश की थी।

उस बैठक के बाद कुछ समय के लिए मामला शांत होता दिखाई दिया, लेकिन अनंत सिंह ने बाद में फिर साफ कर दिया कि वह नीरज कुमार के समर्थन में नहीं हैं और जन सुराज के अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करेंगे।

अब दोबारा मामला शीर्ष नेतृत्व के सामने पहुंचने से यह साफ है कि पहले की सुलह की कोशिश से विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

पार्टी की चुप्पी से उठ रहे सवाल

अनंत सिंह लगातार सार्वजनिक तौर पर अनुज सिंह के समर्थन में नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद उनके खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

गुरुवार की बैठक के बाद भी संजय झा और विजेंद्र यादव ने इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा। इससे फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नेतृत्व अनंत सिंह को लेकर कोई संगठनात्मक फैसला लेने वाला है या चुनाव तक मामले को संभालने की कोशिश की जाएगी।

जेडीयू के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार पहले कह चुके हैं कि यह मामला पार्टी के बड़े नेताओं के संज्ञान में है और उचित समय पर समाधान किया जाएगा।

अनंत-नीरज विवाद की पुरानी पृष्ठभूमि

अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच राजनीतिक मतभेद कोई नया मामला नहीं है। दोनों के बीच मोकामा की राजनीति को लेकर भी लंबे समय से अलग-अलग मौकों पर मतभेद सामने आते रहे हैं।

इस बार विवाद ने चुनावी रूप ले लिया है। नीरज कुमार को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार बनाए जाने के बाद अनंत सिंह ने उनका समर्थन करने के बजाय अनुज सिंह के पक्ष में खड़े होने का फैसला किया।

अनंत सिंह ने खुद इस चुनाव को व्यक्तिगत मुद्दे से जोड़कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है, जबकि जेडीयू की ओर से पार्टी के सभी उम्मीदवारों की जीत को प्राथमिकता बताया गया है।

नीरज कुमार चौथी बार मैदान में

पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार को जेडीयू ने लगातार चौथी बार उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने अनंत सिंह की असहमति के बावजूद उन्हें प्रत्याशी घोषित किया था।

अब नीरज कुमार के सामने चुनावी चुनौती के साथ-साथ पार्टी के भीतर से सामने आया विरोध भी चर्चा में है। वहीं जन सुराज के अनुज सिंह को अनंत सिंह का समर्थन मिलने के बाद मुकाबले का राजनीतिक आयाम और बड़ा हो गया है।

बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल- अगला कदम क्या?

नीतीश कुमार के आवास पर हुई करीब तीन घंटे की बैठक के बाद कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि जेडीयू नेतृत्व अनंत सिंह के खिलाफ क्या कदम उठाएगा।

फिलहाल तस्वीर इतनी साफ है कि पटना स्नातक सीट का चुनाव जेडीयू के भीतर चल रहे मतभेद को सार्वजनिक मंच तक ले आया है। पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार एक तरफ है और उसी दल का विधायक उसके प्रतिद्वंद्वी के समर्थन में सक्रिय है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ जेडीयू नेतृत्व इस विवाद को किस तरह संभालता है और क्या पार्टी की ओर से अनंत सिंह के रुख पर कोई स्पष्ट निर्णय सामने आता है।