बिहार के विश्वविद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था बेहाल: 4 हजार से ज्यादा प्रोफेसर पद खाली, अतिथि शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई
Bihar news: बिहार के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा की स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। राज्य के 13 विश्वविद्यालयों में चार हजार से अधिक सहायक प्रोफेसर के पद वर्षों से खाली पड़े हैं। हालात ऐसे हैं कि पढ़ाई से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की भी भारी कमी है, जहां लिपिक समेत विभिन्न श्रेणियों के तीन हजार से ज्यादा पद अब तक नहीं भरे जा सके हैं।
अतिथि शिक्षकों के सहारे विश्वविद्यालय
शिक्षकों की कमी के कारण अधिकांश विश्वविद्यालय अतिथि शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं। वहीं, कर्मचारियों की अनुपलब्धता को देखते हुए संविदा पर कर्मियों की सेवा ली जा रही है। इससे न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था भी दबाव में है। शिक्षा विभाग लगातार विश्वविद्यालयों से रिक्त पदों की अद्यतन जानकारी मांग रहा है, लेकिन अब तक पूरी और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।
रोस्टर क्लीयरेंस बना बड़ी बाधा
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सहायक प्रोफेसरों की बहाली से पहले आरक्षण रोस्टर का क्लीयरेंस जरूरी है। इसके लिए विश्वविद्यालयों को आरक्षण कोटि के अनुसार पदवार रिक्ति की जानकारी देना अनिवार्य है। विभाग का कहना है कि जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तब तक राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के माध्यम से नई बहाली संभव नहीं है।
बढ़ती जा रही है रिक्तियों की संख्या
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2014 के बाद बिहार लोक सेवा आयोग के जरिए 2849 सहायक प्रोफेसरों की अनुशंसा की गई थी। वहीं 2020 के बाद राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से 2983 शिक्षकों की सिफारिश शिक्षा विभाग को मिली। इसके बावजूद वरिष्ठ शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने और नए कॉलेज खुलने के कारण रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की हालत भी खराब
स्थिति सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं है। शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की कमी भी विश्वविद्यालयों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। बीते चार वर्षों से शिक्षा विभाग पदवार रिक्तियों की जानकारी मांग रहा है, लेकिन अब तक केवल करीब 1200 पदों का ही विवरण मिल पाया है। कर्मचारियों की कमी के कारण फाइलों के निपटारे से लेकर परीक्षा और नामांकन जैसे कार्यों में भी देरी हो रही है।
बहाली का रास्ता कब खुलेगा?
शिक्षा विभाग ने वर्ष 2022 में विश्वविद्यालयों और 279 सरकारी कॉलेजों के लिए एक विशेष पोर्टल तैयार कराया था, ताकि शिक्षकेत्तर कर्मियों की रिक्तियां ऑनलाइन अपलोड की जा सकें। सभी विश्वविद्यालयों से जानकारी मिलने के बाद रोस्टर क्लीयरेंस कराया जाएगा। इसके बाद लिपिक समेत अन्य पदों की बहाली राज्य कर्मचारी चयन आयोग को भेजी जाएगी, जबकि प्रयोगशाला सहायक जैसे तकनीकी पदों के लिए तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
फिलहाल, रिक्त पदों की सही जानकारी न मिलने तक विश्वविद्यालयों में बहाली की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, और इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।







