इलेक्शन ड्यूटी की गोपनीयता भंग होने का आरोप- चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई और जांच की मांग
सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की जानकारी स्प्रेडशीट और लिस्ट के जरिए एकत्र की जा रही है, जिसमें अधिकारी खुद या दबाव में आकर “Election Duty Info” भर रहे हैं। इस खुलासे के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले में तीन बड़े खतरे सामने आए हैं। पहला, राजनीतिक प्रभाव का जोखिम—यदि किसी अधिकारी की तैनाती की जानकारी पहले से सार्वजनिक हो जाती है, तो उस पर दबाव या प्रभाव डालने की आशंका बढ़ जाती है। दूसरा, निष्पक्षता पर खतरा—काउंटिंग प्रक्रिया की गोपनीयता टूटने से चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। तीसरा, दबाव की राजनीति—इस तरह का डेटा कलेक्शन अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का जरिया बन सकता है।
इस पूरे मामले को गंभीर मानते हुए भारत निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है। अपील की गई है कि अधिकारियों को किसी भी संगठन के साथ अपनी ड्यूटी संबंधी जानकारी साझा करने से सख्ती से रोका जाए।
साथ ही उन संगठनों की जांच की मांग भी उठी है, जो इस तरह की संवेदनशील जानकारी इकट्ठा कर रहे हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा मामला है।
अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है और क्या इस पर कोई सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।







