बिजली बिल बकाया रहना बिजली चोरी नहीं, पटना हाईकोर्ट ने FIR की रद्द; कहा- बेईमानी की मंशा साबित करना जरूरी
Bihar news: बिजली बिल का भुगतान नहीं करना अपने आप में बिजली चोरी का अपराध नहीं माना जा सकता। पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में घरेलू बिजली उपभोक्ता को राहत देते हुए बिजली चोरी के आरोप में दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिजली चोरी के आपराधिक मामले में उपभोक्ता की बेईमान मंशा यानी ‘डिशॉनेस्ट इंटेंशन’ साबित करना जरूरी है।
जस्टिस जितेंद्र कुमार की एकल पीठ ने मो. शाहिद इमाम की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
5.39 लाख के बकाये के बाद दर्ज हुई थी FIR
मामला बिजली विभाग की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी से जुड़ा था। विभाग के मुताबिक उपभोक्ता पर करीब 5.39 लाख रुपये का बिजली बिल बकाया था। बकाया के कारण कनेक्शन काटे जाने के बाद भी कथित तौर पर बिजली के अनधिकृत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ बिजली कानून की धारा 135 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
उपभोक्ता ने इस कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
धारा 135 और 126 में कोर्ट ने बताया अंतर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बिजली कानून की धारा 135 और धारा 126 के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया। अदालत ने कहा कि धारा 135 के तहत बिजली चोरी का आपराधिक मामला तभी बनता है, जब चोरी के पीछे बेईमानी की मंशा मौजूद हो और उसे कानूनी रूप से साबित किया जा सके।
वहीं, धारा 126 के तहत बिजली के अनधिकृत इस्तेमाल के मामले में सिविल दायित्व तय किया जा सकता है। इसके लिए आपराधिक मंशा साबित करना जरूरी नहीं है।
बकाया वसूली का अधिकार विभाग के पास
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिजली विभाग कानून के तहत बकाया राशि की वसूली के लिए सिविल कार्रवाई कर सकता है। लेकिन सिर्फ बिजली बिल बकाया होने या अनधिकृत बिजली इस्तेमाल के आधार पर धारा 135 के तहत आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, जब तक चोरी के साथ बेईमानी की मंशा स्थापित न हो।
उपभोक्ता के खिलाफ FIR निरस्त
अदालत के इस आदेश के बाद मो. शाहिद इमाम के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी निरस्त कर दी गई। हाईकोर्ट के फैसले ने यह साफ कर दिया कि बिजली बिल का बकाया और बिजली चोरी कानूनी तौर पर अलग-अलग मामले हैं।
यानी बिल जमा नहीं होने पर बिजली विभाग वसूली की कार्रवाई कर सकता है, लेकिन महज बकाया राशि के आधार पर किसी उपभोक्ता को बिजली चोरी का आरोपी नहीं माना जा सकता। धारा 135 के तहत कार्रवाई के लिए विभाग को बिजली चोरी और उसके पीछे मौजूद बेईमान मंशा का ठोस कानूनी आधार स्थापित करना होगा।







