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डिजिटल दौर में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर जोर: बिहार विधान परिषद में साइबर सिक्योरिटी और AI पर खास कार्यशाला

 
डिजिटल दौर में जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा पर जोर: बिहार विधान परिषद में साइबर सिक्योरिटी और AI पर खास कार्यशाला
Bihar news: डिजिटल तकनीक के तेजी से बढ़ते प्रभाव और साइबर अपराध के खतरे को देखते हुए पटना स्थित बिहार लेजिसलेटिव काउंसिल में मंगलवार को “साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और नई तकनीकों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेष नारायण सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर परिषद के सचिव, The Asia Foundation की इंडिया हेड नंदिता बरुआह, जन जागरण संस्थान के प्रमुख वाई.के. गौतम, तकनीकी सहयोगी संस्था DeepCytes के सह-संस्थापक शुभम पारेख और विशिष्ट अतिथि डॉ. मनीष प्रसाद भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में परिषद के उपसभापति राम बचन राय, विधान पार्षद संजीव कुमार सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया और डिजिटल सुरक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

साइबर सुरक्षा मैनुअल का हुआ लोकार्पण

कार्यशाला के दौरान एक विशेष पहल के तहत विधान परिषद और विधानसभा के सदस्यों के लिए तैयार की गई साइबर सुरक्षा मैनुअल का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया। इस मैनुअल का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उन्हें संभावित साइबर खतरों से बचाव के उपाय बताना है।

लाइव डेमो से समझाए गए डिजिटल खतरे

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कई अहम पहलुओं पर प्रस्तुति दी। इसमें रियल-टाइम साइबर रिस्क असेसमेंट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग तथा फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के तरीकों पर विस्तार से जानकारी दी गई।

लाइव डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से यह भी दिखाया गया कि कैसे एआई तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज या पहचान की नकल कर गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग अक्सर साइबर हमलों का बड़ा लक्ष्य बनते हैं, इसलिए उनके लिए डिजिटल सुरक्षा की समझ बेहद जरूरी है।

युवाओं के लिए नीति बनाने पर भी चर्चा

कार्यक्रम के दौरान यह भी विचार-विमर्श हुआ कि बिहार में युवाओं के लिए साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी प्रभावी नीतियां कैसे तैयार की जाएं, ताकि नई तकनीकों के अवसरों के साथ सुरक्षित डिजिटल वातावरण भी सुनिश्चित किया जा सके।

आयोजकों के अनुसार यह कार्यशाला 11 मार्च तक जारी रहेगी, ताकि जनप्रतिनिधियों को डिजिटल युग की चुनौतियों के प्रति और अधिक जागरूक और सक्षम बनाया जा सके।

कार्यक्रम के अंत में यह संदेश साफ तौर पर उभरकर सामने आया कि आज के दौर में लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए मजबूत डिजिटल जागरूकता उतनी ही जरूरी है, जितनी सुरक्षित मतदान प्रक्रिया।