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पुरानी पेंशन से निजीकरण तक कर्मचारियों का हुंकार, 12 दिसंबर को दिल्ली में राष्ट्रीय रैली का ऐलान

 
पुरानी पेंशन से निजीकरण तक कर्मचारियों का हुंकार, 12 दिसंबर को दिल्ली में राष्ट्रीय रैली का ऐलान

Patna: पुरानी पेंशन बहाली, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक, आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों सहित विभिन्न मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। बिहार अराजपत्रित राज्य कर्मचारी महासंघ के बैनर तले पटना के पीएमसीएच थिएटर में आयोजित राज्य स्तरीय कन्वेंशन में निर्णय लिया गया कि 12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित राष्ट्रीय रैली में बिहार से बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल होंगे। इसके साथ ही 27 से 29 सितंबर तक भोजपुर (आरा) में होने वाले राज्य सम्मेलन में बिहार सरकार के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा भी तय की जाएगी।

महासंघ की राज्य अध्यक्ष नीलम कुमारी की अध्यक्षता में आयोजित इस कन्वेंशन में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शशिकांत राय, सीटू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदीप दत्ता समेत कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नेताओं ने भाग लिया। राज्य के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों कर्मचारी प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन को व्यापक बनाने का संकल्प लिया।

पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग, UPS पर उठाए सवाल

कन्वेंशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने के बजाय यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू कर कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका दिया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे पूरे देश में असंतोष बढ़ रहा है।

संविदा कर्मचारियों के शोषण और निजीकरण का मुद्दा भी उठा

महासंघ ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली होने के बावजूद नियमित नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। उनकी जगह संविदा और ठेका कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है, जिन्हें समान काम के बदले समान वेतन तक नहीं मिल रहा। साथ ही सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर भी चिंता जताते हुए इसे रोजगार और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए नुकसानदायक बताया गया।

आठवें वेतन आयोग को लेकर रखीं कई अहम मांगें

कर्मचारी संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के लिए भी कई प्रमुख मांगें सामने रखीं। इनमें 3.8 फिटमेंट फैक्टर, 5 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, हर पांच वर्ष में वेतन संशोधन, विभिन्न श्रेणियों के शहरों में 30 से 40 प्रतिशत तक एचआरए, 10 हजार रुपये शिशु शिक्षा भत्ता, एक करोड़ रुपये तक हाउस बिल्डिंग एडवांस, 10 लाख रुपये विवाह एवं वाहन ऋण जैसी मांगें शामिल हैं।

सितंबर में आंदोलन की रणनीति होगी तय

महासंघ के राज्य महामंत्री सुबेश सिंह, राज्य अध्यक्ष नीलम कुमारी और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि बिहार सरकार कर्मचारियों की जायज मांगों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है। इसी कारण कर्मचारियों में व्यापक नाराजगी है। उन्होंने बताया कि  27, 28 और 29 सितंबर को भोजपुर (आरा) में आयोजित राज्य सम्मेलन में सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में सभी जिलों, अनुमंडलों और प्रखंड स्तर पर सभाएं आयोजित कर कर्मचारियों को एकजुट किया जाएगा, ताकि  12 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली राष्ट्रीय रैली को ऐतिहासिक बनाया जा सके।