80 साल की उम्र में भी अंग्रेजों से लोहा: वीर कुंवर सिंह की जयंती पर सभापति ने किया नमन
सभापति ने बताया कि बाबू कुंवर सिंह का जन्म शाहाबाद (वर्तमान भोजपुर) के जगदीशपुर में हुआ था और उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने की भावना विरासत में मिली थी। 23 अप्रैल को उनकी जयंती ‘विजयोत्सव दिवस’ के रूप में मनाई जाती है, क्योंकि इसी दिन 1858 में उन्होंने जगदीशपुर के पास अंग्रेजों के खिलाफ ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
उन्होंने कहा कि कुंवर सिंह की वीरता केवल बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने कई राज्यों में जाकर आजादी की लड़ाई को मजबूती दी। कानपुर में नाना साहब के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और 80 वर्ष की उम्र में भी हार नहीं मानी।
सभापति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे कुंवर सिंह के साहस, त्याग और देशभक्ति से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। यह अवसर न सिर्फ एक महान योद्धा को याद करने का था, बल्कि उनके आदर्शों को आत्मसात करने का भी संदेश दे गया।







