बिहार में अब राशन दुकानों पर मिल सकता है रोजमर्रा का सामान, PDS दुकानदारों की कमाई बढ़ाने की तैयारी; 15 दिन में आएगी रिपोर्ट
Bihar news: बिहार में जन वितरण प्रणाली यानी PDS को लेकर सरकार अब बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। राशन दुकानों को सिर्फ खाद्यान्न वितरण तक सीमित रखने के बजाय यहां रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ी दूसरी उपयोगी वस्तुओं की बिक्री की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इससे एक ओर लाभुकों को अतिरिक्त सुविधा मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ PDS दुकानदारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का रास्ता भी खुल सकता है।
खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने PDS विक्रेताओं की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति यह अध्ययन करेगी कि राशन दुकानों से अनाज के अलावा किन-किन उपयोगी वस्तुओं की बिक्री कराई जा सकती है और इसके लिए बिहार में किस तरह की व्यवस्था सबसे बेहतर रहेगी।
15 दिन में सरकार को रिपोर्ट देगी समिति
इस पूरी व्यवस्था का अध्ययन करने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के विशेष सचिव उपेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में समिति बनाई गई है। समिति को राज्य में PDS दुकानदारों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ाने से जुड़े सभी पहलुओं की समीक्षा करने का जिम्मा दिया गया है।
समिति दूसरे राज्यों में राशन दुकानों के जरिए अतिरिक्त सामान बेचने की मौजूदा व्यवस्थाओं और वहां किए जा रहे नए प्रयोगों का भी अध्ययन करेगी। इसके बाद बिहार की जरूरत और परिस्थितियों के हिसाब से व्यावहारिक मॉडल तैयार करने की कोशिश होगी।
समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी अनुशंसा और सुझाव विभाग को सौंपने का निर्देश दिया गया है।
PDS दुकानों के लिए तैयार होगी SOP
सरकार समिति के जरिए इस नई व्यवस्था को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी तैयार कराना चाहती है। इसमें यह देखा जाएगा कि राशन दुकानदारों को अतिरिक्त आय का अवसर कैसे मिले और साथ ही लाभुकों को भी इसका सीधा फायदा कैसे पहुंचाया जा सके।
समिति बैठकों और विस्तृत विचार-विमर्श के जरिए यह तय करने की कोशिश करेगी कि किन वस्तुओं को PDS दुकानों पर बिक्री के लिए शामिल किया जा सकता है और इसकी प्रक्रिया क्या होगी।
दुकानदारों की कमाई बढ़ाने पर सरकार का फोकस
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पात्र लाभुकों को बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में PDS विक्रेताओं की भूमिका अहम है।
सरकार का मानना है कि दुकानदारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से राशन वितरण व्यवस्था को भी लंबे समय तक बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इसी वजह से अब PDS दुकानों को अतिरिक्त आय का माध्यम बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है।
दूसरे राज्यों के मॉडल से सीख लेगी बिहार सरकार
समिति दूसरे राज्यों में लागू उन व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी, जहां PDS दुकानों के जरिए खाद्यान्न के अलावा अन्य सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। बेहतर मॉडल और प्रयोगों की समीक्षा के बाद बिहार के लिए उपयोगी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश होगी।
मंत्री अशोक चौधरी के मुताबिक सरकार का मकसद PDS को सिर्फ राशन बांटने वाली व्यवस्था तक सीमित रखना नहीं है। इसे पारदर्शी, प्रभावी, आर्थिक रूप से व्यवहार्य और ज्यादा जनोपयोगी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
अगर राशन दुकानों पर रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं भी उपलब्ध होने लगती हैं, तो लोगों को अलग-अलग जगहों पर जाने की जरूरत कम होगी। वहीं दुकानदारों के लिए अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी बन सकता है।
समिति में कौन-कौन शामिल?
समिति में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, निगम मुख्यालय और अनुभाजन से जुड़े अधिकारियों के साथ फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है।
समिति के अध्यक्ष: उपेन्द्र कुमार, विशेष सचिव, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग
सदस्य: राकेश रमण, महाप्रबंधक, निगम मुख्यालय, पटना; चित्रगुप्त कुमार, विशिष्ट पदाधिकारी अनुभाजन, पटना; सृष्टि प्रिया, विशेष कार्य पदाधिकारी; अमित रंजन, अवर सचिव; दयानन्द प्रसाद, प्रदेश महामंत्री, फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन; वरुण कुमार सिंह; गौरव लाभ, प्रदेश महामंत्री, फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन।
अब समिति की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बिहार में PDS दुकानों पर किन अतिरिक्त वस्तुओं की बिक्री की अनुमति दी जाएगी और नई व्यवस्था को किस रूप में लागू किया जाएगा।







