महंगी गैस ने बिगाड़ा कारोबार का गणित! बिहार में कमर्शियल सिलिंडर की खपत में भारी गिरावट
जानकारी के अनुसार, फरवरी में 19 किलोग्राम वाला व्यावसायिक एलपीजी सिलिंडर जहां करीब 2,010 रुपये में उपलब्ध था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 3,421 रुपये तक पहुंच गई है। कुछ ही महीनों में हुई इस बड़ी बढ़ोतरी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों की लागत में जबरदस्त इजाफा कर दिया है।
इंडियन ऑयल के आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी पटना में फरवरी के दौरान हर महीने लगभग 32 हजार से अधिक कमर्शियल सिलिंडरों की खपत होती थी, जो अब घटकर करीब 24 हजार रह गई है। यानी खपत में 26 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं पूरे बिहार में कमर्शियल गैस की खपत करीब 35 प्रतिशत तक कम हो गई है।
बढ़ती कीमतों के कारण कई होटल और रेस्तरां संचालक अब कोयला, इंडक्शन चूल्हा और अन्य वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि गैस पर निर्भर रहना अब पहले की तुलना में काफी महंगा हो गया है, जिससे संचालन लागत लगातार बढ़ रही है।
राजधानी के कई प्रतिष्ठानों ने बताया कि पहले जहां हर महीने 20 से 30 गैस सिलिंडर की खपत होती थी, वहीं अब इसकी संख्या काफी कम हो गई है। कुछ रेस्तरां संचालकों ने कहा कि ग्राहकों पर सीधा बोझ डालने से बचने के लिए फिलहाल छूट और ऑफर कम किए गए हैं, लेकिन यदि कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो मेन्यू की दरें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
मिठाई दुकानों और भोजनालयों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। कई प्रतिष्ठानों ने खर्च नियंत्रित करने के लिए कोयले के उपयोग को बढ़ाया है, जबकि कुछ ने गैस की खपत सीमित कर दी है। कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती लागत के साथ-साथ ग्राहकों की संख्या में भी कमी देखने को मिल रही है, जिससे दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
व्यापार जगत का मानना है कि यदि व्यावसायिक एलपीजी की कीमतों में राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी इसका असर पड़ सकता है। होटल और रेस्तरां उद्योग से जुड़े लोग सरकार से कमर्शियल गैस की कीमतों पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं, ताकि छोटे और मध्यम कारोबारों को राहत मिल सके।







