Newshaat_Logo

बिहार में शोधार्थियों का आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी, तेजस्वी यादव ने दिया समर्थन; राज्यपाल से मुलाकात का आश्वासन

 
बिहार में शोधार्थियों का आमरण अनशन सातवें दिन भी जारी, तेजस्वी यादव ने दिया समर्थन; राज्यपाल से मुलाकात का आश्वासन

Bihar News: बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से जुड़ी मांगों को लेकर शोधार्थियों एवं पीएच.डी. धारकों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। पटना के गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर All Ph.D. Holders & Research Scholars Association of Bihar के बैनर तले चल रहा आमरण अनशन सोमवार को सातवें दिन भी जारी रहा।

एसोसिएशन के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल, अभिषेक मेहता और बीकु सिंह प्रधान पिछले सात दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि लगातार अनशन के कारण तीनों की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। वहीं, उनके समर्थन में बड़ी संख्या में शोधार्थी और पीएच.डी. धारक महाधरना में शामिल हैं।

तेजस्वी यादव से मिले शोधार्थियों के प्रतिनिधि

इसी बीच शोधार्थियों और पीएच.डी. धारकों का एक प्रतिनिधिमंडल बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें आंदोलन की स्थिति, अनशनकारियों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और एसोसिएशन की विभिन्न मांगों की जानकारी दी।

प्रतिनिधिमंडल में डॉ. उमेश कुमार, भीम यादव और रजनीश कुमार प्रमुख रूप से शामिल रहे। प्रतिनिधियों की बात सुनने के बाद तेजस्वी यादव ने आमरण अनशन का समर्थन किया और मामले में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।

एसोसिएशन के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और शोधार्थियों एवं पीएच.डी. धारकों के हित में आवश्यक सहयोग करेंगे।

नियुक्ति से लेकर सेवा नियमित करने तक कई मांगें

आंदोलन कर रहे शोधार्थियों की मांगों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में UGC Regulation 2018 की Table 3A लागू करना, अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष निर्धारित करना और बिहार के विश्वविद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत सहायक प्राध्यापकों की सेवा नियमित करना शामिल है।

इसके अलावा एसोसिएशन सहायक प्राध्यापक नियुक्ति में डोमिसाइल नीति लागू करने, वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को सेवा सामंजन का लाभ देने तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग कर रहा है।

‘यह सिर्फ नौकरी का नहीं, उच्च शिक्षा के भविष्य का सवाल’

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का कहना है कि आंदोलन को केवल कुछ लोगों की नियुक्ति या व्यक्तिगत हितों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था, शोधार्थियों, पीएच.डी. धारकों और शिक्षित युवाओं के भविष्य से जुड़ा व्यापक मुद्दा है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि सात दिनों से आमरण अनशन जारी रहने के बावजूद सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं हुई है। अनशनकारियों की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार को तत्काल वार्ता शुरू करनी चाहिए।

एसोसिएशन ने बिहार सरकार से अपील की है कि आंदोलनकारियों के साथ जल्द बातचीत कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाए, ताकि अनशन समाप्त हो और उच्च शिक्षा से जुड़े इन मुद्दों का समाधान निकाला जा सके।