बेतिया नगर निगम में करोड़ों का फर्जीवाड़ा बेनकाब: विकास योजनाओं में नकली एफडी से खेल, महापौर ने मांगी हाईलेवल जांच
Bihar news: नगर निगम में विकास के नाम पर चल रहे कथित काले खेल का बड़ा खुलासा सामने आया है। बेतिया नगर निगम की महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने विकास योजनाओं के आवंटन में करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए प्रशासन और बैंकिंग व्यवस्था दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मामला ठेकेदारों द्वारा बैंक गारंटी के नाम पर फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जमा कराने से जुड़ा है, जिसके सहारे कई बड़ी योजनाएं हासिल की गईं।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर महापौर ने नगर आयुक्त लक्ष्मण तिवारी को एक सख्त पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि दोषी संवेदकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत आपराधिक कार्रवाई की जाए।
नकली एफडी से मिली करोड़ों की योजनाएं
महापौर ने बताया कि नगर निगम में किसी भी विकास कार्य के आवंटन से पहले संवेदकों को बैंक गारंटी के रूप में एफडी के मूल दस्तावेज जमा करने का प्रावधान है। लेकिन आरोप है कि कई संवेदकों ने असली एफडी की जगह फर्जी बैंक एफडी के कागजात निगम में जमा कर दिए और इसी आधार पर करोड़ों रुपये की योजनाएं अपने नाम कर लीं।
बैंकों की भूमिका भी सवालों में
मामले को और गंभीर बनाते हुए महापौर ने यह भी खुलासा किया कि कुछ मामलों में संबंधित बैंकों की ओर से फर्जी एफडी का सत्यापन प्रमाण पत्र भी निगम को दिया गया है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित आर्थिक अपराध हो सकता है।
पांच साल की सभी एफडी की जांच के आदेश
महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने निर्देश दिया है कि पिछले पांच वर्षों में निगम में जमा कराई गई सभी संवेदकों की एफडी की संबंधित बैंकों से गहन जांच कराई जाए। जांच पूरी होने तक किसी भी संवेदक को एफडी की राशि वापस नहीं करने का आदेश दिया गया है। साथ ही बैंकों से प्राप्त जांच रिपोर्ट और अब तक की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्योरा महापौर को सौंपने को कहा गया है।
“यह सिर्फ धोखाधड़ी नहीं, जनहित से खिलवाड़”
महापौर ने दो टूक शब्दों में कहा कि फर्जी एफडी जमा करना नगर निगम के साथ धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि जनता के पैसे और राष्ट्रीय हित के साथ विश्वासघात है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि दोषी चाहे संवेदक हों या बैंक से जुड़े लोग, किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
अब पूरे जिले की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में कितने ठेकेदारों और किन-किन बैंकों की भूमिका उजागर होती है, और प्रशासन इस कथित घोटाले पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।







