चरवाहा विद्यालय से IIM तक… अब शिक्षा में नया अध्याय लिखेंगे मिथिलेश तिवारी, पदभार संभालते ही दिखाया विजन
मीडिया से बातचीत के दौरान मिथिलेश तिवारी ने बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि यह वही धरती है जिसने दुनिया को ज्ञान और शिक्षा का रास्ता दिखाया है। उन्होंने कहा कि बिहार ने चरवाहा विद्यालय से लेकर IIM तक का सफर तय किया है और अब वक्त शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का है।
नए शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे युवाओं के रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि बिहार के छात्र सिर्फ नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि अवसर पैदा करने वाले बनें।
TRE-4 परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद और अभ्यर्थियों की चिंता पर भी मिथिलेश तिवारी ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पहले वे विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक करेंगे, पूरी स्थिति समझेंगे और फिर अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान निकालेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि “बीच का कोई न कोई रास्ता जरूर निकलेगा।”
अपने अनुभव का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि वे सिर्फ राजनेता नहीं, बल्कि खुद एक शिक्षक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यक्ति रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कोचिंग संस्थान भी चलाया है, इसलिए छात्रों और शिक्षकों की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझते हैं।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा, “शिक्षक वह होता है जो खुद मोमबत्ती की तरह जलकर दूसरों के जीवन में रोशनी देता है।”
मिथिलेश तिवारी ने अंत में भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में बिहार का शिक्षा विभाग सिर्फ राज्य ही नहीं, बल्कि देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में सामने आएगा।







