‘गार्गी शक्ति संवाद’ से गूंजा पटना: महिला नेतृत्व के दम पर ‘नए बिहार’ का विजन हुआ मजबूत
कार्यक्रम के दौरान कोर टीम के साथ गहन विचार-विमर्श करते हुए अभियान के पंचम वार्षिकोत्सव पर आयोजित होने वाली ‘बिहार सांस्कृतिक पुनर्जागरण महासभा 2026’ में हजारों महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयासों की सराहना की गई। उपस्थित सभी विदुषियों को उनके योगदान के लिए बधाई दी गई।
महिला शक्ति बना बदलाव का आधार
इस अवसर पर कहा गया कि गार्गी अध्याय आज बिहार में प्रबुद्ध और संकल्पित महिलाओं का एक सशक्त वैचारिक मंच बन चुका है। महान विदुषी Gargi Vachaknavi की ज्ञान परंपरा और उनके साहसिक संवादों को याद करते हुए महिलाओं को समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
तेजी से बढ़ रहा अभियान का दायरा
अभियान से अब तक 3.55 लाख से अधिक लोग स्वेच्छा से जुड़ चुके हैं, जिनमें 30 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं। बिहार के 18 जिलों में 33 निःशुल्क शिक्षा केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिनमें से 28 केंद्र ‘गार्गी पाठशाला’ के रूप में महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
शिक्षा और स्वरोजगार पर खास फोकस
वंचित महिलाओं के लिए ‘गार्गी कला कौशल केंद्र’ और ‘गार्गी कृत्या’ जैसे प्रयासों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 1000 से अधिक अग्रणी महिलाओं को सम्मानित कर उनके मनोबल को भी बढ़ाया गया है।
2047 के लक्ष्य पर नजर
कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित बिहार के निर्माण के लिए इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाना जरूरी है। महिलाओं की भागीदारी को इस लक्ष्य की कुंजी बताया गया।
संवाद के अंत में सभी विदुषियों ने गार्गी पाठशालाओं के विस्तार और महिला सशक्तिकरण के इस अभियान को और गति देने का संकल्प लिया।







