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‘गार्गी उद्यमी सखी सावन महोत्सव’ में दिखा नारी शक्ति का दम, विकसित बिहार के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी पर जोर

 
‘गार्गी उद्यमी सखी सावन महोत्सव’ में दिखा नारी शक्ति का दम, विकसित बिहार के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी पर जोर

Bihar News: बिहार की महिला उद्यमिता, संस्कृति और आत्मनिर्भरता को समर्पित ‘गार्गी उद्यमी सखी सावन महोत्सव 2026’ का आयोजन पटना में किया गया। Let’s Inspire Bihar के अंतर्गत गार्गी अध्याय की ओर से आयोजित यह महोत्सव इस वर्ष पांचवीं बार हुआ। कार्यक्रम में महिला उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, हुनर और उद्यमशीलता का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा गया कि 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित बिहार का सपना तभी साकार होगा, जब महिलाएं राज्य के आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास में अग्रणी भूमिका निभाएंगी। बिहार की महिलाओं में नेतृत्व, रचनात्मकता, ज्ञान और उद्यमिता की अपार क्षमता है। जरूरत इस क्षमता को सही अवसर और मंच उपलब्ध कराने की है, ताकि महिलाएं अपनी प्रतिभा को आर्थिक और सामाजिक योगदान में बदल सकें।

गार्गी अध्याय से जुड़ीं 40 हजार से अधिक महिलाएं

कार्यक्रम में बताया गया कि गार्गी अध्याय अब बिहार के विकास के लिए काम कर रहीं प्रबुद्ध और जागरूक महिलाओं का बड़ा सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक मंच बन चुका है। Let’s Inspire Bihar अभियान से स्वैच्छिक आधार पर जुड़े 4 लाख से अधिक लोगों में 40 हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।

गार्गी अध्याय के माध्यम से महिलाएं एक-दूसरे से सीखने, अपने कौशल को विकसित करने और नए उद्यम खड़े करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। गार्गी पाठशालाओं और महिला केंद्रित कौशल एवं उद्यमिता कार्यक्रमों के जरिए आर्थिक रूप से वंचित महिलाओं और बालिकाओं तक शिक्षा एवं अवसर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

बिहार के 20 जिलों में संचालित 41 निःशुल्क पाठशालाओं में 36 केंद्र महिलाओं के नेतृत्व में गार्गी पाठशाला के रूप में चल रहे हैं। इन केंद्रों से 3 हजार से अधिक आर्थिक रूप से वंचित विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है।

गार्गी वाचक्नवी की परंपरा से आधुनिक महिलाओं को प्रेरणा

कार्यक्रम में गार्गी वाचक्नवी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि गार्गी केवल इतिहास की एक विदुषी नहीं, बल्कि प्रश्न करने, ज्ञान की खोज करने और तर्कपूर्ण संवाद की भारतीय परंपरा का प्रतीक हैं। गार्गी और महर्षि याज्ञवल्क्य के बीच हुए प्रसिद्ध संवाद का उदाहरण देते हुए कहा गया कि बिहार की प्राचीन बौद्धिक परंपरा ज्ञान को जाति, संप्रदाय और लिंग की सीमाओं से ऊपर रखती थी।

‘मिथिला, मगध, भोजपुर के रंग एक संग’ ने मोहा मन

महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने भी खूब आकर्षण बटोरा। ‘मिथिला, मगध, भोजपुर के रंग एक संग’ थीम पर सावन कॉन्टेस्ट वॉक एंड इंट्रोडक्शन आयोजित किया गया। इसमें प्रतिभागियों ने बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों की पारंपरिक वेशभूषा, संस्कृति और विरासत को मंच पर जीवंत किया।

वहीं महिला उद्यमियों ने विभिन्न स्टॉल और प्रदर्शनियों के जरिए अपने उत्पादों, हुनर और नए प्रयोगों को प्रदर्शित किया। इससे महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार, नेटवर्किंग और नए कारोबारी अवसरों से जुड़ने का मंच मिला।

उत्कृष्ट महिला उद्यमियों को मिला सम्मान

कार्यक्रम में लोक गायिका नीतू कुमारी नूतन, राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व सदस्य सुषमा साहू, बिहार महिला उद्योग संघ की अध्यक्ष उषा झा, दीपक ठाकुर, डॉ. बी. प्रियम, निशा मदन झा, आम्रपाली और डॉ. पूनम चौधरी समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। निर्णायक की भूमिका डॉ. स्मृति रावत और खुशबू फातमा ने निभाई।

आयोजन में गार्गी अध्याय से जुड़ी नेहा सिंह, शायरीन इरम, करिश्मा, नितिका अग्रवाल, नम्रता कुमारी, सुधा रंजन, रूपा मेहता, अंजलि और निशा भगत समेत कई महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिला उद्यमियों को ‘गार्गी उद्यमिता सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

महोत्सव ने यह संदेश दिया कि बिहार की महिलाएं अपनी परंपरा, प्रतिभा और आधुनिक सोच को साथ लेकर आगे बढ़ रही हैं। महिला उद्यमिता को मजबूत करने की ऐसी पहलें विकसित बिहार के लक्ष्य को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।