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गया के विकास को नई रफ्तार, फल्गु नदी किनारे आधुनिक सुविधाओं से लैस LPG शवदाह गृह का निर्माण होगा

Gaya: गया में फल्गु नदी के पूर्वी तट पर एक आधुनिक LPG शवदाह गृह बनाने की योजना एक महत्वपूर्ण शहरी और धार्मिक बुनियादी ढांचा परियोजना मानी जा रही है. यह पहल खासकर उन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए सुविधाजनक होगी जो पारंपरिक अंतिम संस्कार के लिए फल्गु नदी के तट पर आते हैं.
 
Gaya News

Gaya: गयाजी के मानपुर के भुसुंडा स्थित फल्गु नदी के पूर्वी तट पर एलपीजी (LPG) आधारित आधुनिक शवदाह गृह का निर्माण होगा.

इस परियोजना का निर्माण कार्य ईशा फाउंडेशन की अनुषंगी संस्था ईशा आउटरीच चैरिटेबल ट्रस्ट और नगर विकास एवं आवास विभाग के साथ एक एमओयू साइन किया गया है.

इसी के तहत गुरुवार को ईशा फाउंडेशन के टीम और नगर आयुक्त श्री अभिषेक पलासिया ने मानपुर के भुसुंडा स्थित फल्गु नदी के पूर्वी तट स्थल निरीक्षण किया गया. उसके बाद गया नगर निगम ने इस परियोजना को लेकर कांट्रैक्ट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए.

नगर आयुक्त श्री अभिषेक पलासिया ने बताया ईशा फाउंडेशन के द्वारा LPG अत्याधुनिक और प्रदूषण रहित तकनीक का उपयोग कर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा.

प्रस्तावित शवदाह गृह में पारंपरिक धार्मिक विधियों के पालन के बाद पहली बार एलपीजी के माध्यम से दाह संस्कार किया जाएगा, जिसमें सीमित मात्रा में लकड़ी का भी उपयोग होगा, ताकि परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बना रहे.

उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था से लकड़ी पर निर्भरता काफी हद तक कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और वायु प्रदूषण में भी कमी आएगी.

साथ ही अंत्येष्टि की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज, स्वच्छ और व्यवस्थित हो सकेगी, जिससे आम लोगों को बेहतर और सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध होंगी.

इस परियोजना के अंतर्गत शवदाह गृह के डिजाइन, निर्माण और उसके संचालन एवं रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी ईशा आउटरीच चैरिटेबल ट्रस्ट की होगी.

इस संबंध में फाउंडेशन के टीम ने बताया कि जैसे जीवित लोगों के प्रति हमारी जिम्मेदारियाँ हैं, वैसे ही मृतकों के प्रति भी हमारी जिम्मेदारियाँ हैं.

एलपीजी-आधारित सुविधाओं का एक पहलू यह है कि ये दाह संस्कार की प्रक्रिया को आर्थिक और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ और अनुकूल बनाती हैं. 

इससे भी अधिक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हम दिवंगत आत्मा को एक सम्मानजनक विदाई दें, जिसमें शीघ्र, स्वच्छ और प्रभावपूर्ण दाह संस्कार की व्यवस्था हो, तथा दिवंगत और उनके स्वजनों के लिए संवेदनशीलता और देखभाल का एक उचित वातावरण उपलब्ध हो.