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क्लासरूम में गूंजती गीता की तान: गया की शालिनी टीचर ने संगीत से बदल दिया पढ़ाने का अंदाज़

 
क्लासरूम में गूंजती गीता की तान: गया की शालिनी टीचर ने संगीत से बदल दिया पढ़ाने का अंदाज़

Bihar news: बिहार के गया जिले से शिक्षा की दुनिया में एक अलग और प्रेरक तस्वीर सामने आई है, जहां एक लेडी टीचर अपने अनोखे शिक्षण तरीके से न सिर्फ बच्चों का मन जीत रही हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई हैं।

गयाजी शहर के मारणपुर स्थित दया प्रकाश सरस्वती विद्या मंदिर की संगीत और हिंदी शिक्षिका शालिनी राजपूत बच्चों को किताबों से आगे ले जाकर संस्कारों से जोड़ने का काम कर रही हैं। वे अक्षर ज्ञान के साथ-साथ श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक संगीत के माध्यम से सिखाती हैं।

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हारमोनियम के मधुर सुरों पर जब शालिनी राजपूत गीता के श्लोक गाती हैं, तो पूरा क्लासरूम बिना माइक के उनकी आवाज से गूंज उठता है। बच्चे न सिर्फ ध्यान से सुनते हैं, बल्कि कठिन श्लोक भी आसानी से याद कर लेते हैं। पढ़ाई का यह अंदाज़ बच्चों के लिए बोझ नहीं, बल्कि आनंद बन गया है।

शालिनी बताती हैं कि संगीत उन्हें विरासत में मिला है और वे महज तीन साल की उम्र से गायन कर रही हैं। उन्होंने महसूस किया कि परीक्षा और पढ़ाई का दबाव बच्चों को तनाव में डाल देता है। इसी वजह से उन्होंने गीता के श्लोकों को संगीत से जोड़कर पढ़ाने की शुरुआत की, जिसका असर बेहद सकारात्मक रहा।

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उनका मानना है कि शिक्षा सिर्फ नंबरों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संस्कार और जीवन मूल्य भी शामिल होने चाहिए। शालिनी राजपूत का यह प्रयोग आज बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों—तीनों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

गया की यह लेडी टीचर साबित कर रही हैं कि अगर पढ़ाने का तरीका दिल से जुड़ा हो, तो शिक्षा खुद एक संगीत बन जाती है।