कांवड़ पथ पर सरकार का जवाब: भागलपुर–बांका रूट पर नई सड़क पर ‘विचार’, अभी नहीं मिली मंजूरी
सदस्य ने कहा कि वर्तमान में भारी वाहनों के आवागमन के कारण कांवड़ियों को काफी परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। खासतौर पर सिमरिया से रोसड़ा, बेगूसराय, बहेड़ी होते हुए मधुबनी तथा कहलगांव–बटेश्वर स्थान से बासुकीनाथ तक अलग कांवड़ पथ निर्माण की जरूरत बताई गई।
सरकार का क्या है रुख?
पथ निर्माण विभाग की ओर से दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया कि कहलगांव और बटेश्वर स्थान से घोघा होते हुए बासुकीनाथ तक वर्तमान में अलग कांवड़ पथ का प्रावधान नहीं है। हालांकि तकनीकी संभावना, वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर इस पर विचार किया जा सकता है।
सरकार ने यह भी बताया कि संबंधित मार्गों की कुल लंबाई और वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया है। बिहार क्षेत्र में लगभग 87.10 किलोमीटर और झारखंड क्षेत्र में करीब 35.90 किलोमीटर लंबाई का हिस्सा शामिल है।
मुख्य चिंता?
सदन में यह मुद्दा उठाया गया कि मौजूदा सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव रहता है, जिससे सावन के दौरान हजारों की संख्या में पैदल चलने वाले कांवड़ियों को जोखिम उठाना पड़ता है। अलग कांवड़ पथ बनने से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकती है और यातायात भी सुचारु रहेगा।
फिलहाल क्या होगा आगे?
सरकार ने साफ किया है कि नए कांवड़ पथ के निर्माण पर अंतिम निर्णय तकनीकी सर्वे, संसाधनों की उपलब्धता और प्राथमिकता तय होने के बाद ही लिया जाएगा।
सवाल अब यह है कि क्या आने वाले समय में कांवड़ियों की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होगी या यह प्रस्ताव फाइलों में ही सीमित रह जाएगा?







