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पटना में लगेगा ‘ग्रीन-टेक’ का महाकुंभ! नई तकनीकों से किसानों की खेती बनेगी ज्यादा मुनाफे वाली

 
पटना में लगेगा ‘ग्रीन-टेक’ का महाकुंभ! नई तकनीकों से किसानों की खेती बनेगी ज्यादा मुनाफे वाली
    •    21 से 23 मार्च तक ज्ञान भवन में ‘बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव-2026’
    •    स्टार्टअप से लेकर इंटरनेशनल तकनीक तक-खेती के हर नए मॉडल की झलक
    •    मखाना बोर्ड, लीची प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात पर सरकार का फोकस
Bihar News: पटना में पहली बार खेती और बागवानी से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का बड़ा मंच सजने जा रहा है। रामकृपाल यादव ने जानकारी दी कि 21 से 23 मार्च तक ज्ञान भवन में ‘बिहार नर्सरी एवं ग्रीन-टेक कॉनक्लेव-2026’ का आयोजन होगा, जहां किसान नई तकनीकों और नवाचारों से रूबरू होंगे।

खेती में टेक्नोलॉजी का नया दौर
इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में किसानों को कम लागत में ज्यादा उत्पादन के तरीके सिखाए जाएंगे। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के 8 संस्थान और बिहार के 12 से अधिक प्रगतिशील किसान इसमें भाग लेंगे। खास तौर पर ‘चाणक्या हॉर्टि-पिच’ नाम का एक अलग पैवेलियन तैयार किया जा रहा है, जहां कृषि स्टार्टअप्स को अपने इनोवेशन दिखाने का मौका मिलेगा।

76% आबादी खेती पर निर्भर, सरकार का फोकस बढ़ी आय पर
मंत्री ने बताया कि बिहार की लगभग 76 फीसदी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में नई तकनीकों के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने नीतीश कुमार के उस विजन का जिक्र किया, जिसमें बिहार के उत्पादों को देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।

मखाना से लीची तक-ग्लोबल मार्केट पर नजर
बिहार के पारंपरिक उत्पाद जैसे मखाना, मुजफ्फरपुर की लीची और भागलपुर का जर्दालू आम पहले ही अपनी पहचान बना चुके हैं। अब इन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो रही है। मंत्री ने बताया कि मखाना विकास बोर्ड का कार्यालय दरभंगा या मुजफ्फरपुर में खोला जाएगा, जिससे इस क्षेत्र के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा।

लीची प्रोसेसिंग यूनिट पर बड़ा प्लान
लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और बेहतर पैकेजिंग के लिए बिहार में आधुनिक प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की योजना पर काम चल रहा है। इसे पीपीपी मॉडल पर स्थापित किया जाएगा और निवेशकों को विशेष सब्सिडी भी दी जाएगी।

किसानों के लिए बड़ा मौका
यह कॉनक्लेव सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि किसानों के लिए सीखने, समझने और नई तकनीकों को अपनाने का बड़ा अवसर साबित हो सकता है। साफ है कि बिहार अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी आधारित कृषि की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।