PMCH विवाद पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, अधीक्षक तलब; नर्स-जूनियर डॉक्टर विवाद की होगी उच्चस्तरीय जांच
Bihar News: राजधानी पटना के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच (PMCH) में नर्सों और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुए विवाद ने तूल पकड़ लिया है। मामले को गंभीर मानते हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने अस्पताल के अधीक्षक को तलब किया है। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखना और मरीजों को किसी तरह की असुविधा से बचाना है।
दरअसल, विवाद की शुरुआत एक महिला नर्स के पति की इलाज के दौरान मौत के बाद हुई। मृतक पटना जिले के मोकामा के रहने वाले थे। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके बाद अस्पताल की नर्सें विरोध में उतर आईं और कार्य बहिष्कार कर दिया। करीब आठ घंटे तक चली इस हड़ताल के कारण ऑपरेशन थिएटर सहित कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित रहीं। इस दौरान 52 निर्धारित सर्जरी भी स्थगित करनी पड़ीं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बाद में पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने नर्सों से वार्ता कर दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद नर्सों ने आंदोलन समाप्त कर काम पर वापसी कर ली। हालांकि, इसके बाद पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने भी अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। इसका असर ओपीडी, जनरल वार्ड और ऑपरेशन थिएटर की सेवाओं पर पड़ा, जबकि इमरजेंसी, आईसीयू, लेबर रूम और आपातकालीन ऑपरेशन सेवाएं जारी रहीं।
पूरे मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सात सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
इधर, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) अस्पताल का औचक निरीक्षण भी किया। निरीक्षण के दौरान लापरवाही सामने आने पर दो डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई। डॉ. राकेश कुमार रोशन को ड्यूटी से अनुपस्थित मिलने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जबकि न्यूरो विभाग के डॉ. श्याम किशोर से मरीज को सरकारी अस्पताल के बजाय बाहर जांच कराने की सलाह देने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और मरीजों के हितों से समझौता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।







