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गंगा की धारा का दबाव बढ़ा, काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर हाई अलर्ट; मंत्री ने लिया जायजा

 
गंगा की धारा का दबाव बढ़ा, काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर हाई अलर्ट; मंत्री ने लिया जायजा

Bihar news: गंगा की धारा के तटबंध की ओर खिसकने से काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध पर बढ़े दबाव के बीच पथ निर्माण मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने कटाव प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया। मंत्री ने जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारियों और अभियंताओं के साथ मौके पर पहुंचकर तटबंध की मौजूदा स्थिति और चल रहे बाढ़ संघर्षात्मक कार्यों की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कटाव की गंभीरता, गंगा की धारा के दबाव, क्षतिग्रस्त E-Nose के कट-एंड की सुरक्षा और डाउनस्ट्रीम में हो रहे भूक्षरण की स्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें तटबंध को सुरक्षित रखने के लिए किए जा रहे विभिन्न सुरक्षात्मक उपायों से अवगत कराया।

कटाव रोकने के लिए दिन-रात चल रहा काम

तटबंध के संवेदनशील हिस्से की सुरक्षा के लिए फिलहाल बड़े स्तर पर संसाधन लगाए गए हैं। क्षतिग्रस्त E-Nose के हिस्से को सुरक्षित रखने के साथ डाउनस्ट्रीम में हो रहे भूक्षरण को नियंत्रित करने का काम जारी है। पानी के फैलाव को सीमित करने और दोनों कट-एंड को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से रिंग बांध का निर्माण भी कराया जा रहा है।

मौके पर करीब 2.50 लाख बालू भरे बोरे, 20 नाव, 30 ट्रैक्टर, एक पोकलेन और तीन जेसीबी उपलब्ध कराए गए हैं। लगभग 250 श्रमिक दिन-रात बाढ़ संघर्षात्मक कार्य में जुटे हुए हैं। इसके अलावा मुख्यालय स्तर से दो विशेष दल भी मौके पर तैनात किए गए हैं।

अधिकारियों को सुरक्षा कार्य में तेजी के निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री इं. कुमार शैलेंद्र ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि तटबंध की सुरक्षा के लिए चल रहे तत्कालीन कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आवश्यक तकनीकी उपायों को पूरी तत्परता से लागू करने और स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने को कहा।

मंत्री ने कहा कि तटबंध और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गंगा की धारा और कटाव की स्थिति को देखते हुए जरूरत के अनुसार बाढ़ संघर्षात्मक कार्य लगातार जारी रखे जाएंगे।

बाढ़ के बाद होगी स्थायी सुरक्षा की योजना

अधिकारियों के मुताबिक मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए तत्काल सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं। वहीं, बाढ़ का पानी उतरने के बाद तटबंध की दीर्घकालिक सुरक्षा को लेकर विस्तृत अध्ययन कराया जाएगा।

इसके लिए मैथमेटिकल मॉडलिंग और उसके अध्ययन के परिणामों के आधार पर आगे की तकनीकी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल प्रशासन और विभाग की प्राथमिकता तटबंध के संवेदनशील हिस्से को सुरक्षित रखना और कटाव को आगे बढ़ने से रोकना है।