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नाबालिग अपहरण केस में पुलिस जांच पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- केस डायरी में सिर्फ खानापूर्ति, नई SIT गठित करने का आदेश

 
नाबालिग अपहरण केस में पुलिस जांच पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- केस डायरी में सिर्फ खानापूर्ति, नई SIT गठित करने का आदेश

Bihar News:  नाबालिग लड़की के कथित अपहरण और उसे वेश्यावृत्ति में धकेलने के गंभीर मामले में पटना हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कहा कि जांच केवल कागजों तक सीमित रही और कई अहम पहलुओं की अनदेखी की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है।

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस कुमार मनीष की खंडपीठ लाल बहादुर दास की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि 22 जुलाई 2025 को गिरफ्तार आरोपियों के बयान में जिन लोगों के नाम सामने आए थे, उनसे लगभग एक सप्ताह तक पूछताछ तक नहीं की गई। 22 जुलाई के बाद अगली केस डायरी 29 जुलाई को लिखी गई, जिससे जांच की रफ्तार और गंभीरता पर अदालत ने सवाल उठाए।

कोर्ट ने कहा कि केस डायरी में सैकड़ों पैराग्राफ दर्ज हैं, लेकिन उनमें अधिकांश केवल औपचारिकता निभाने जैसे प्रतीत होते हैं। एक ही तरह की बातों को बार-बार दोहराया गया, जबकि जिन स्थानों पर पीड़िता को ले जाने की बात सामने आई थी, वहां पुलिस ने छापेमारी तक नहीं की। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मामले की निगरानी कर रहे अधिकारियों ने भी अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता एस डी संजय और सरकारी वकील किंकर कुमार ने भी स्वीकार किया कि जांच में अपेक्षित गंभीरता नहीं बरती गई। उन्होंने अदालत को बताया कि पूर्णिया के एसपी से बातचीत के बाद नई एसआईटी गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो पीड़िता की बरामदगी और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तत्काल काम शुरू करेगी।

पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि नई एसआईटी का नेतृत्व ऐसे अनुभवी पुलिस अधिकारी को सौंपा जाए, जिसे इस तरह के संवेदनशील मामलों की जांच का अनुभव हो। साथ ही कहा कि पीड़िता की तलाश के लिए एसआईटी चौबीसों घंटे काम करेगी और जांच में किसी भी तरह की प्रशासनिक बाधा नहीं आने दी जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई 2026 को होगी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर उसे वेश्यावृत्ति में धकेलने की साजिश रची गई, लेकिन कई शिकायतों और उच्च अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।