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शराब बरामदगी केस में हाईकोर्ट की अनोखी शर्त, उत्तम कुमार को मिली अग्रिम जमानत; ₹15 हजार से खगड़िया कोर्ट परिसर में लगेंगे फूलों के गमले

 
शराब बरामदगी केस में हाईकोर्ट की अनोखी शर्त, उत्तम कुमार को मिली अग्रिम जमानत; ₹15 हजार से खगड़िया कोर्ट परिसर में लगेंगे फूलों के गमले

Patna: पटना हाईकोर्ट ने शराब बरामदगी से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत देते हुए ऐसी शर्त लगाई है, जिसने इस आदेश को खास बना दिया है। खगड़िया के परबत्ता थाना कांड संख्या 259/2026 से जुड़े मामले में अदालत ने आरोपी उत्तम कुमार को गिरफ्तारी से राहत दी है। साथ ही उन्हें ₹15 हजार की राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), खगड़िया को देने का निर्देश दिया गया है। इस राशि का इस्तेमाल खगड़िया सिविल कोर्ट परिसर में फूलों के गमले लगाने के लिए किया जाएगा।

यह आदेश पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव राय की एकल पीठ ने Criminal Miscellaneous No. 63052 of 2026 की सुनवाई के दौरान दिया।

खुले खेत से 81.450 लीटर शराब बरामदगी का मामला

मामला परबत्ता थाना क्षेत्र में 81.450 लीटर विदेशी शराब की कथित बरामदगी से जुड़ा है। पुलिस की ओर से अदालत में बताया गया कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक खुले खेत में छापेमारी की गई थी, जहां से शराब जब्त की गई। इसके बाद बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम की धारा 30(a) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

आरोपी उत्तम कुमार ने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।

अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा ने रखी ये दलील

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ब्रजेश वर्मा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि शराब की कथित बरामदगी आरोपी के घर या किसी बंद परिसर से नहीं हुई है। शराब एक खुले खेत से बरामद की गई थी, इसलिए इसे याचिकाकर्ता के सचेत कब्जे (conscious possession) से जोड़ना उचित नहीं है।

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी को उसके पूर्व आपराधिक इतिहास के आधार पर मामले में शामिल किया गया है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने पटना हाईकोर्ट के फुल बेंच के फैसले Ram Vinay Yadav vs. State of Bihar, 2019 (2) PLJR 1089 का भी हवाला दिया।

राज्य ने जमानत का किया विरोध

राज्य की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री मोहम्मद इफतेखार महमूद ने अग्रिम जमानत का विरोध किया। उन्होंने आरोपी के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए अदालत के सामने अपनी आपत्ति रखी।

हालांकि, अदालत ने मामले के तथ्यों, दोनों पक्षों की दलीलों और पूर्व न्यायिक फैसले को ध्यान में रखा। कोर्ट ने विशेष रूप से इस तथ्य पर गौर किया कि कथित शराब की बरामदगी खुले खेत से हुई थी, न कि आरोपी के प्रत्यक्ष या सचेत कब्जे से।

₹15 हजार से कोर्ट परिसर में लगाए जाएंगे फूलों के गमले

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से बिना आरोप स्वीकार किए एक सामाजिक योगदान का प्रस्ताव भी रखा गया। इसके तहत ₹15 हजार जिला विधिक सेवा प्राधिकार, खगड़िया को देने की सहमति जताई गई।

हाईकोर्ट ने इस शर्त को आदेश का हिस्सा बनाते हुए निर्देश दिया कि इस राशि से खगड़िया के सिविल कोर्ट परिसर में फूलों के गमले लगाए जाएंगे। राशि भारतीय स्टेट बैंक की स्थानीय शाखा से जारी डिमांड ड्राफ्ट के जरिए जमा करनी होगी। खर्च की रसीद DLSA की ओर से ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।

10 हजार के बेल बॉन्ड पर मिलेगी राहत

कोर्ट ने निर्देश दिया कि गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की स्थिति में आरोपी को ₹10 हजार के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों के आधार पर जमानत दी जा सकती है। इनमें से एक जमानतदार आरोपी का परिवार का सदस्य या रिश्तेदार होना चाहिए और उसे संबंधित आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा।

आरोपी को जांच में सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर पुलिस के सामने उपस्थित होने का भी निर्देश दिया गया है।

छह महीने तक हर पखवाड़े थाने में हाजिरी

जमानत की शर्तों के तहत आरोपी को छह महीने तक हर 15 दिन में संबंधित थाने में जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके बाद निर्धारित प्रमाण पत्र ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा।

इसके अलावा ट्रायल कोर्ट की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहना होगा। लगातार दो तारीखों पर बिना उचित कारण अनुपस्थित रहने की स्थिति में जमानत रद्द की जा सकती है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी किसी गवाह को प्रभावित करने, धमकाने या साक्ष्य से छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं करेगा। दोबारा किसी आपराधिक मामले में शामिल होने पर भी जमानत रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है।

जमानत के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

इस आदेश का सबसे अलग पहलू यह है कि अग्रिम जमानत के साथ कोर्ट परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए आर्थिक योगदान की शर्त रखी गई है। इसे न्यायिक प्रक्रिया में सुधारात्मक और सामाजिक जिम्मेदारी के दृष्टिकोण से देखा जा सकता है।

यानी इस मामले में अदालत के आदेश से एक ओर आरोपी को गिरफ्तारी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर कोर्ट परिसर में हरियाली बढ़ाने के लिए योगदान की व्यवस्था भी हुई। यह पहल न्यायिक आदेशों में सामाजिक जिम्मेदारी के एक अलग पहलू को सामने लाती है।